कुरान - 21:103 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

103
لَا يَحۡزُنُهُمُ ٱلۡفَزَعُ ٱلۡأَكۡبَرُ وَتَتَلَقَّىٰهُمُ ٱلۡمَلَـٰٓئِكَةُ هَٰذَا يَوۡمُكُمُ ٱلَّذِي كُنتُمۡ تُوعَدُونَ

Transliteration: (Laa yahzunuhumul faza'ul akbaru wa tatalaq qaahumul malaaa'ikatu haazaa Yawmukumul lazee kuntum too'adoon)

103. उन्हें वह सबसे बड़ी घबराहट (अल-फ़ज़उल अकबर) ज़रा भी ग़मगीन नहीं करेगी [159], और फ़रिश्ते उनका इस्तक़बाल करते हुए कहेंगे, 'यह तुम्हारा वही दिन है जिसका तुमसे वादा किया जाता था [160]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 103 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 103 की तफ़सीर

"उन्हें वह सबसे बड़ी घबराहट (अल-फ़ज़उल अकबर) ज़रा भी ग़मगीन नहीं करेगी [159], और फ़रिश्ते उनका इस्तक़बाल करते हुए कहेंगे, 'यह तुम्हारा वही दिन है जिसका तुमसे वादा किया जाता था [160]!'"

[159] महशर की अज़ीम घबराहट से औलिया का अमन

क़ियामत के दिन जब ज़मीन कांपेगी, आसमान फटेगा और सूरज सवा नेज़े पर आ जाएगा, उस दिन की अज़ीम वहशत व घबराहट (अल-फ़ज़उल अकबर) से अल्लाह के नेक बंदों (औलिया व सालेहीन) को कोई रंज या ख़ौफ़ न पहुंचेगा। वे अर्शे इलाही के साये में बा-इज़्ज़त और पुर-सुकून होंगे।

[160] फ़रिश्तों का पुर-तपाक इस्तक़बाल

फ़रिश्ते क़ब्रों से उठते ही मोमिनों का इस्तक़बाल करेंगे, मुबारकबाद पेश करेंगे और फ़रमाएंगे कि आज तुम्हारी कामयाबी और राहत का दिन है जिसका तुमसे अंबिया की मारफ़त वादा किया जाता था।

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