Transliteration: (Laa yahzunuhumul faza'ul akbaru wa tatalaq qaahumul malaaa'ikatu haazaa Yawmukumul lazee kuntum too'adoon)
"उन्हें वह सबसे बड़ी घबराहट (अल-फ़ज़उल अकबर) ज़रा भी ग़मगीन नहीं करेगी [159], और फ़रिश्ते उनका इस्तक़बाल करते हुए कहेंगे, 'यह तुम्हारा वही दिन है जिसका तुमसे वादा किया जाता था [160]!'"
क़ियामत के दिन जब ज़मीन कांपेगी, आसमान फटेगा और सूरज सवा नेज़े पर आ जाएगा, उस दिन की अज़ीम वहशत व घबराहट (अल-फ़ज़उल अकबर) से अल्लाह के नेक बंदों (औलिया व सालेहीन) को कोई रंज या ख़ौफ़ न पहुंचेगा। वे अर्शे इलाही के साये में बा-इज़्ज़त और पुर-सुकून होंगे।
फ़रिश्ते क़ब्रों से उठते ही मोमिनों का इस्तक़बाल करेंगे, मुबारकबाद पेश करेंगे और फ़रमाएंगे कि आज तुम्हारी कामयाबी और राहत का दिन है जिसका तुमसे अंबिया की मारफ़त वादा किया जाता था।
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