कुरान - 21:101 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

101
إِنَّ ٱلَّذِينَ سَبَقَتۡ لَهُم مِّنَّا ٱلۡحُسۡنَىٰٓ أُوْلَـٰٓئِكَ عَنۡهَا مُبۡعَدُونَ

Transliteration: (Innal lazeena sabaqat lahum minnal husnaaa ulaaa'ika 'anhaa mub'adoon)

101. बेशक जिन लोगों के लिए हमारी तरफ़ से भलाई (जन्नत) का फ़ैसला पहले ही हो चुका है, वे उस (जहन्नम) से बहुत दूर रखे जाएंगे [157] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 101 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 101 की तफ़सीर

"बेशक जिन लोगों के लिए हमारी तरफ़ से भलाई (जन्नत) का फ़ैसला पहले ही हो चुका है, वे उस (जहन्नम) से बहुत दूर रखे जाएंगे [157] ।"

[157] अहले ईमान और अंबिया-ओ-औलिया की महफ़ूज़ियत

जब आयत 98 नाज़िल हुई, तो मुशरिक़ीन (जैसे इब्ने ज़ुबअरी) ने एतराज़ किया कि ईसाइयों ने हज़रत ईसा को और यहूदियों ने हज़रत उज़ैर को पूजा है, तो क्या वे भी जहन्नम में जाएंगे? इस पर यह आयत नाज़िल हुई कि जिन मुक़द्दस हस्तियों और मोमिनीन के लिए अज़ल से जन्नत और हुस्ना का फ़ैसला हो चुका है, वे जहन्नम से बहुत दूर महफ़ूज़ रहेंगे। अंबिया और सालेहीन हर ऐब और अज़ाब से पाक हैं।

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