Transliteration: (Lahum feehaa zafeerunw wa hum feehaa laa yasma'oon)
"उनके लिए उसमें चीख़ व पुकार होगी, और वे उसमें (अज़ाब की वजह से) कुछ न सुन सकेंगे [156] ।"
जहन्नम में काफ़िरों की आवाज़ें गधे के रेंकने और ज़फ़री चीख़ों जैसी होंगी। आग के शोर, खौलते हुए पानी की गड़गड़ाहट और अपनी तक्लीफ़ के सबब वे एक-दूसरे की बात भी न सुन सकेंगे। हर मुजरिम को आग के एक संदूक़ में बंद कर दिया जाएगा जहाँ वह मुकम्मल बेबसी और तन्हाई के अज़ाब में होगा।
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