कुरान - 21:100 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

100
لَهُمۡ فِيهَا زَفِيرٞ وَهُمۡ فِيهَا لَا يَسۡمَعُونَ

Transliteration: (Lahum feehaa zafeerunw wa hum feehaa laa yasma'oon)

100. उनके लिए उसमें चीख़ व पुकार होगी, और वे उसमें (अज़ाब की वजह से) कुछ न सुन सकेंगे [156] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 100 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 100 की तफ़सीर

"उनके लिए उसमें चीख़ व पुकार होगी, और वे उसमें (अज़ाब की वजह से) कुछ न सुन सकेंगे [156] ।"

[156] जहन्नमियों की चीख़-पुकार और तन्हाई का अज़ाब

जहन्नम में काफ़िरों की आवाज़ें गधे के रेंकने और ज़फ़री चीख़ों जैसी होंगी। आग के शोर, खौलते हुए पानी की गड़गड़ाहट और अपनी तक्लीफ़ के सबब वे एक-दूसरे की बात भी न सुन सकेंगे। हर मुजरिम को आग के एक संदूक़ में बंद कर दिया जाएगा जहाँ वह मुकम्मल बेबसी और तन्हाई के अज़ाब में होगा।

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