कुरान - 21:99 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

99
لَوۡ كَانَ هَـٰٓؤُلَآءِ ءَالِهَةٗ مَّا وَرَدُوهَاۖ وَكُلّٞ فِيهَا خَٰلِدُونَ

Transliteration: (Law kaana haaa'ulaaa'i aalihatan maa waradoohaa wa kullun feehaa khaalidoon)

99. अगर ये सचमुच माबूद होते तो इसमें दाख़िल न होते [154]; और सब के सब उसमें हमेशा-हमेशा रहेंगे [155] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 99 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 99 की तफ़सीर

"अगर ये सचमुच माबूद होते तो इसमें दाख़िल न होते [154]; और सब के सब उसमें हमेशा-हमेशा रहेंगे [155] ।"

[154] बुतों की ख़ुदाई का खुला बुतलान

अल्लाह तआला ने वाज़ेह फ़रमाया कि अगर इन बुतों में ख़ुदाई की कोई भी सिफ़त होती, तो वे जहन्नम की आग में न जलते। जो खुद आग से नहीं बच सकते, वे माबूद कैसे हो सकते हैं?

[155] जहन्नम का दायमी अज़ाब

काफ़िर और मुशरिक़ीन जहन्नम में हमेशा-हमेशा रहेंगे, उन्हें कभी इससे रिहाई नहीं मिलेगी और न उनके अज़ाब में कोई तख़फ़ीफ़ (कमी) की जाएगी।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now