कुरान - 21:97 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

97
وَٱقۡتَرَبَ ٱلۡوَعۡدُ ٱلۡحَقُّ فَإِذَا هِيَ شَٰخِصَةٌ أَبۡصَٰرُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ يَٰوَيۡلَنَا قَدۡ كُنَّا فِي غَفۡلَةٖ مِّنۡ هَٰذَا بَلۡ كُنَّا ظَٰلِمِينَ

Transliteration: (Waqtarabal wa'dul haqqu fa-izaa hiya shaakhisatun absaarul lazeena kafaroo yaawailanaa qad kunna fee ghaflatin min haaza bal kunnaa zaalimeen)

97. और सच्चा वादा (क़ियामत) बिल्कुल क़रीब आ पहुंचेगा; तो अचानक काफ़िरों की आंखें फटी की फटी रह जाएंगी [151] (और वे कहेंगे), 'हाय हमारी बर्बादी! हम तो इस (दिन) से ग़फ़लत में थे, बल्कि हम ही ज़ालिम थे [152]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 97 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 97 की तफ़सीर

"और सच्चा वादा (क़ियामत) बिल्कुल क़रीब आ पहुंचेगा; तो अचानक काफ़िरों की आंखें फटी की फटी रह जाएंगी [151] (और वे कहेंगे), 'हाय हमारी बर्बादी! हम तो इस (दिन) से ग़फ़लत में थे, बल्कि हम ही ज़ालिम थे [152]!'"

[151] क़ियामत की होलनाकी और काफ़िरों की दहशत

सूर फूंके जाने पर जब क़ियामत बरपा होगी, तो काफ़िरों की आंखें ख़ौफ़ व दहशत के मारे पथरा जाएंगी और फटी की फटी रह जाएंगी। उस दिन की हैबत उनके होश उड़ा देगी।

[152] ऐन वक़्त पर बे-फ़ायदा पछतावा

काफ़िर चीख़ उठेंगे कि अफ़सोस हम दुनिया में इस दिन से बे-ख़बर रहे बल्कि जान-बूझकर अपनी जानों पर ज़ुल्म करते रहे। लेकिन उस वक़्त का इक़रार-ए-जुर्म और पछतावा कोई नफ़ा न देगा क्योंकि अमल का वक़्त गुज़र चुका होगा।

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