कुरान - 21:102 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

102
لَا يَسۡمَعُونَ حَسِيسَهَاۖ وَهُمۡ فِي مَا ٱشۡتَهَتۡ أَنفُسُهُمۡ خَٰلِدُونَ

Transliteration: (Laa yasma'oona hasee sahaa wa hum fee mash tahat anfusuhum khaalidoon)

102. वे उसकी (जहन्नम की) हल्की सी सरगोशी भी नहीं सुनेंगे, और वे अपनी मनपसंद नेमतों में हमेशा-हमेशा रहेंगे [158] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 102 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 102 की तफ़सीर

"वे उसकी (जहन्नम की) हल्की सी सरगोशी भी नहीं सुनेंगे, और वे अपनी मनपसंद नेमतों में हमेशा-हमेशा रहेंगे [158] ।"

[158] अहले जन्नत का दायमी अमन व सुकून

मोमिनीन और औलिया-ए-किराम जहन्नम से इस क़दर दूर और महफ़ूज़ होंगे कि उन्हें जहन्नम की लपटों की सांय-सांय या चीख़ने की हल्की सी आहट भी सुनाई न देगी। वे जन्नत के आलीशान महल्लात में अपनी मनपसंद लज़ीज़ नेअमतों और दीदारे इलाही की लज़्ज़तों में हमेशा-हमेशा शाद व कामरान रहेंगे।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now