कुरान - 21:8 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
وَمَا جَعَلۡنَٰهُمۡ جَسَدٗا لَّا يَأۡكُلُونَ ٱلطَّعَامَ وَمَا كَانُواْ خَٰلِدِينَ

Transliteration: (Wa maa ja'alnaahum jasadal laa ya'kuloonat ta'aama wa maa kaanoo khaalideen)

8. और हमने उन्हें ऐसे जिस्म नहीं बनाए थे कि वे खाना न खाएं [14], और न वे हमेशा दुनिया में रहने वाले थे [15] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 8 की तफ़सीर

"और हमने उन्हें ऐसे जिस्म नहीं बनाए थे कि वे खाना न खाएं [14], और न वे हमेशा दुनिया में रहने वाले थे [15] ।"

[14] नबियों का खाना-पीना और बशरियत

मुशरिकों का यह ऐतराज़ था कि अगर यह नबी हैं तो बाज़ारों में क्यों चलते हैं और खाना क्यों खाते हैं? जवाब दिया गया कि पिछले तमाम नबी भी इंसानी तक़ाज़ों के तहत खाना-पीना करते थे।

ज़ाहिरी तौर पर खाना-पीना उनकी बशरियत का इज़हार था, जबकि बातिनी तौर पर उनका मक़ाम और रूहानी कमाल आम मख़लूक़ से बिल्कुल मुम्ताज़ था।

[15] विसाल और मक़ाम-ए-नबूवत

दुनिया में कोई मख़लूक़ हमेशा बाक़ी रहने वाली नहीं है। मौत का ज़ायका चखना नबूवत की शान के ख़िलाफ़ नहीं है, बल्कि अंबिया-ए-किराम अपनी क़ब्रों में ज़िंदा हैं और उन्हें रिज़्क़ दिया जाता है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now