Transliteration: (Wa maa ja'alnaahum jasadal laa ya'kuloonat ta'aama wa maa kaanoo khaalideen)
"और हमने उन्हें ऐसे जिस्म नहीं बनाए थे कि वे खाना न खाएं [14], और न वे हमेशा दुनिया में रहने वाले थे [15] ।"
मुशरिकों का यह ऐतराज़ था कि अगर यह नबी हैं तो बाज़ारों में क्यों चलते हैं और खाना क्यों खाते हैं? जवाब दिया गया कि पिछले तमाम नबी भी इंसानी तक़ाज़ों के तहत खाना-पीना करते थे।
ज़ाहिरी तौर पर खाना-पीना उनकी बशरियत का इज़हार था, जबकि बातिनी तौर पर उनका मक़ाम और रूहानी कमाल आम मख़लूक़ से बिल्कुल मुम्ताज़ था।
दुनिया में कोई मख़लूक़ हमेशा बाक़ी रहने वाली नहीं है। मौत का ज़ायका चखना नबूवत की शान के ख़िलाफ़ नहीं है, बल्कि अंबिया-ए-किराम अपनी क़ब्रों में ज़िंदा हैं और उन्हें रिज़्क़ दिया जाता है।
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