कुरान - 21:6 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

6
مَآ ءَامَنَتۡ قَبۡلَهُم مِّن قَرۡيَةٍ أَهۡلَكۡنَٰهَآۖ أَفَهُمۡ يُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Maaa aaamanat qablahum min qaryatin ahlaknaahaa a-fahum yu'minoon)

6. इनसे पहले कोई बस्ती जिस पर हमने अज़ाब नाज़िल किया ईमान न लाई; तो क्या अब ये लोग ईमान लाएंगे [11]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 6 की तफ़सीर

"इनसे पहले कोई बस्ती जिस पर हमने अज़ाब नाज़िल किया ईमान न लाई; तो क्या अब ये लोग ईमान लाएंगे [11]?"

[11] माज़ी की हलाक-शुदा बस्तियों से सबक़

क़ौमे नूह, आद और समूद ने भी अपने नबियों से मुतालबात करके मनमाने मौजिज़ात मांगे थे, मगर मौजिज़ात देखने के बावजूद ईमान न लाए और हलाक कर दिए गए।

अगर मक्के के मुशरिकों की फ़रमाइश पर भी वैसा ही मौजिज़ा ज़ाहिर कर दिया जाता और वे ईमान न लाते, तो दस्तूर-ए-इलाही के मुताबिक़ उन पर भी फ़ौरी हलाकत का अज़ाब आ जाता। अल्लाह ने अपने महबूब (ﷺ) की रहमत के सदक़े में उन पर ऐसा अज़ाब नहीं उतारा।

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