Transliteration: (Maaa aaamanat qablahum min qaryatin ahlaknaahaa a-fahum yu'minoon)
"इनसे पहले कोई बस्ती जिस पर हमने अज़ाब नाज़िल किया ईमान न लाई; तो क्या अब ये लोग ईमान लाएंगे [11]?"
क़ौमे नूह, आद और समूद ने भी अपने नबियों से मुतालबात करके मनमाने मौजिज़ात मांगे थे, मगर मौजिज़ात देखने के बावजूद ईमान न लाए और हलाक कर दिए गए।
अगर मक्के के मुशरिकों की फ़रमाइश पर भी वैसा ही मौजिज़ा ज़ाहिर कर दिया जाता और वे ईमान न लाते, तो दस्तूर-ए-इलाही के मुताबिक़ उन पर भी फ़ौरी हलाकत का अज़ाब आ जाता। अल्लाह ने अपने महबूब (ﷺ) की रहमत के सदक़े में उन पर ऐसा अज़ाब नहीं उतारा।
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