Transliteration: (Bal qaalooo adghaasu ahlaamin bal iftaraahu bal huwa shaa'irun fal ya'tinaa bi Aayatin kamaa ursilal awwaloon)
"बल्कि वे बोले, 'ये तो परेशान ख़्वाब हैं, बल्कि इन्होंने इसे ख़ुद गढ़ लिया है, बल्कि ये तो कोई शायर हैं [9]! तो ये हमारे पास कोई ऐसी निशानी लाएं जैसी कि पहले नबियों को दी गई थी' [10] ।"
इससे मालूम हुआ कि झूठे और हठधर्म इंसान का कोई एक स्टैंड नहीं होता। जब मुशरिक़ीन क़ुरआन के मुक़ाबले में आजिज़ आ गए, तो कभी उसे परेशान ख़्वाब कहा, कभी बोहतान कहा, और कभी शायरी का नाम दिया।
यहाँ 'शायरी' से मुराद तक़फ़ीया नहीं, बल्कि कलाम की अज़ीम तासीर और हुस्न को नज़रअंदाज़ करके इल्ज़ाम तराशी करना था।
वे अहले किताब के यहूदियों के बहकावे में आकर कहते थे कि जैसे हज़रत मूसा का असा या यद-ए-बैज़ा था, या हज़रत सालेह की ऊँटनी थी, वैसा कोई मौजिज़ा हमें दिखाया जाए।
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