Transliteration: (Laahiyatan quloobuhum; wa asarrun najwal lazeena zalamoo hal haazaaa illaa basharum mislukum 'afa ta'toonas sihra wa antum tubsiroon)
"उनके दिल खेल में पड़े हैं [5]; और ज़ालिमों ने आपस में चुपके-चुपके मशवरा किया [6] कि 'ये कौन हैं? क्या ये तुम्हारी तरह के एक बशर ही नहीं हैं? क्या तुम आँखें देखते जादू के पास जाते हो?' [7]"
उनके दिल दुनियावी लह्वो-लब (खेल-तमाशे) में ऐसे ग़र्क़ हो चुके हैं कि क़ुरआन की हौलनाक चेतावनियाँ भी उन पर असर नहीं करतीं।
मक्के के मुशरिकों ने चुपके-चुपके साज़िशें रचीं और ताना दिया कि 'यह तो हमारी तरह के एक इंसान हैं, फिर इन्हें नबी कैसे मान लें?'
यह गुमराहों का क़दीम तरीक़ा रहा है कि वे अंबिया-ए-किराम की नूरी हक़ीक़त, इस्मत और मक़ाम को छोड़कर सिर्फ़ उनकी ज़ाहिरी बशरियत पर निगाह रखते हैं और इसी वजह से ईमान से महरूम रह जाते हैं।
वे क़ुरआने मजीद की बेमिसाल फ़साहत, तासीर और मोजिज़ाती कलाम को देखकर भी हठधर्मी में उसे 'जादू' कहने लगे। जानते-बूझते हक़ को जादू कहना उनके शदीद इनआद और बुग़्ज़ की अलामत थी।
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