कुरान - 7:133 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

133
فَأَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِمُ ٱلطُّوفَانَ وَٱلۡجَرَادَ وَٱلۡقُمَّلَ وَٱلضَّفَادِعَ وَٱلدَّمَ ءَايَٰتٖ مُّفَصَّلَٰتٖ فَٱسۡتَكۡبَرُواْ وَكَانُواْ قَوۡمٗا مُّجۡرِمِينَ

अनुवाद -

फिर हमने उन पर तूफ़ान [276], टिड्डियाँ [277], जूँ [278], मेंढक [279] और ख़ून [280] भेजा — खुली निशानियाँ। मगर वे घमंड करने लगे और गुनाहगार क़ौम बन गए।

सूरह अल-आराफ आयत 133 तफ़सीर


📖 सूरा अल-आ'राफ़ – आयत 133 की तफ़्सीर

✅ [276] तूफ़ान – डुबो देने वाली चेतावनी

  • सबसे पहला अज़ाब एक भारी तूफ़ान की सूरत में आया।
  • घर डूब गए, बैठे हुए लोग डूबे और खड़े लोग गर्दनों तक पानी में डूब गए।
  • मगर बनी इस्राईल महफ़ूज़ रहे।
  • यह अज़ाब एक हफ़्ते (शनिवार से शनिवार) तक जारी रहा।
  • आख़िरकार फिरऔन ने झूठे वादे किए और हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की दुआ से यह अज़ाब टल गया।

✅ [277] टिड्डियाँ – रोज़ी का सफ़ाया

  • तूफ़ान के बाद, टिड्डियों के झुंड आए और उन्होंने खेत, अनाज, छतें, यहाँ तक कि क़िब्तियों के नाख़ून तक चबा डाले।
  • सात दिन तक सब तबाह रहा।
  • क़ौम ने फिर से ईमान लाने का वादा किया, हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने दुआ की और अज़ाब हट गया।

✅ [278] जूँ – न टलने वाली तकलीफ़

  • फिर उन्होंने वादा तोड़ा तो अल्लाह ने उन पर जूँ और कीड़े छोड़ दिए।
  • ये उनके जिस्म से चिपककर उनका ख़ून और जिस्म खा जाते।
  • अनाज को बहुत पीसते तब भी बहुत कम आटा निकलता।
  • यह अज़ाब एक हफ़्ते तक रहा।
  • मजबूर होकर उन्होंने फिर दुआ की दरख़्वास्त की।

✅ [279] मेंढक – चारों तरफ़ हावी

  • एक महीने बाद उन पर मेंढक छोड़ दिए गए।
  • खाने, पानी, हांडी, तंदूर और कुओं तक में मेंढक भर गए।
  • यह अज़ाब भी एक हफ़्ते तक चला।
  • थककर उन्होंने फिर वादा किया और दुआ से अज़ाब हट गया।

✅ [280] ख़ून – ईमान व कुफ़्र का फ़र्क़

  • फिर उन्होंने दोबारा वादा तोड़ा तो सब कुछ ख़ून में बदल गया।
  • कुएँ, नहरें, खाना, यहाँ तक कि रोटी तक ख़ून बन गई।
  • जब बनी इस्राईल और क़िब्ती एक साथ खाते तो इस्राईली का हिस्सा पानी रहता और क़िब्ती का हिस्सा ख़ून बन जाता।
  • यहाँ तक कि अगर इस्राईली का पानी का घड़ा क़िब्ती के बर्तन में उड़ेला जाता, तो पानी ख़ून बन जाता।
  • यह साफ़ मौजिज़ा था कि अल्लाह ने ईमान वालों और इनकार करने वालों को जुदा कर दिया।

👉 इन सब ख़ुली निशानियों के बावजूद, फिरऔन और उसकी क़ौम घमंड और गुनाह पर जमे रहे, जिससे साबित हुआ कि मोजिज़ात भी उस दिल को हिदायत नहीं दे सकते जो मुहर लगा हो।

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