कुरान - 7:132 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

132
وَقَالُواْ مَهۡمَا تَأۡتِنَا بِهِۦ مِنۡ ءَايَةٖ لِّتَسۡحَرَنَا بِهَا فَمَا نَحۡنُ لَكَ بِمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Wa qaaloo mahmaa taatinaa bihee min Aayatil litas'haranaa bihaa famaa nahnu laka bimu'mineen)

और उन्होंने कहा: "तुम चाहे कैसी भी निशानी हमारे पास ले आओ कि उससे हमें जादू में फंसा दो, हम कभी तुम पर ईमान नहीं लाएँगे [275]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 132 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ'राफ़ – आयत 132 की तफ़्सीर

✅ [275] घमंडी इनकार अल्लाह के अज़ाब का सबब बनता है

  • फिरऔन और उसकी क़ौम ने साफ़ कह दिया कि हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) चाहे कैसी भी निशानी और मोजिज़ा दिखाएँ, वे उसे जादू ही समझेंगे और कभी ईमान नहीं लाएँगे।
  • यह हठधर्मी और घमंड की इंतिहा थी, क्योंकि वे दिल से जानते थे कि ये अल्लाह की तरफ़ से हैं, मगर अकड़ ने उन्हें मानने न दिया।
  • जब इनकार इस हद तक पहुँच गया, तो हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह से दुआ की कि अब इन पर अज़ाब नाज़िल हो, क्योंकि इनकी बग़ावत हद से गुज़र चुकी है।
  • नतीजतन, अल्लाह तआला ने उन पर पाँच या छः मुख़्तलिफ़ अज़ाबात एक के बाद एक भेजे, जिनका तफ़्सील आगे की आयतों में ज़िक्र है।

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