कुरान - 7:130 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

130
وَلَقَدۡ أَخَذۡنَآ ءَالَ فِرۡعَوۡنَ بِٱلسِّنِينَ وَنَقۡصٖ مِّنَ ٱلثَّمَرَٰتِ لَعَلَّهُمۡ يَذَّكَّرُونَ

Transliteration: (Wa laqad akhaznaaa Aala Fir'awna bis sineena wa naqsim minas samaraati la'allahum yazzakkaroon)

और बेशक, हमने फिरऔन की क़ौम को कई सालों तक क़हत और फलों की कमी [271] में पकड़ा, ताकि वे नसीहत हासिल करें [272]।a (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 130 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ'राफ़ – आयत 130 की तफ़्सीर

✅ [271] अल्लाह की तरफ़ से आज़माइश और चेतावनी

  • फिरऔन और उसकी क़ौम ने 320 साल ऐश-ओ-आराम में गुज़ारे थे।
  • उसके बाद अल्लाह ने उन्हें शिद्दत के क़हत और भूख में मुبتला कर दिया, ताकि उनकी घमंड और सरकशी टूटे।
  • फिरऔन जिसने कभी भूख का तजुर्बा न किया था, वह भी इस तकलीफ़ में गिरफ़्तार हुआ।
  • यह सिखाता है कि दुनियावी मुश्किलें अल्लाह की तरफ़ से इत्तेफ़ाक़न नहीं आतीं, बल्कि नसीहत और तौबा का मौका होती हैं।

✅ [272] नेमतों की छीन ली जाना

  • यह क़हत और कमी सिर्फ़ देहात की खेती तक सीमित न रही, बल्कि शहरों के बाग़-बगीचे और फलदार दरख़्त भी सूख गए।
  • गेंहूँ की फ़सलें नाकाम हो गईं और बाग़ात बेरंग हो गए।
  • इस तरह उनकी नेमतें छीन ली गईं, ताकि वे सबक़ लेकर हक़ की तरफ़ लौटें।
  • मगर घमंड और कुफ्र ने उनकी आँखें बंद कर दीं, और वे नसीहत लेने के बजाय गुमराही में डटे रहे।

 

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now