कुरान - 7:128 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

128
قَالَ مُوسَىٰ لِقَوۡمِهِ ٱسۡتَعِينُواْ بِٱللَّهِ وَٱصۡبِرُوٓاْۖ إِنَّ ٱلۡأَرۡضَ لِلَّهِ يُورِثُهَا مَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦۖ وَٱلۡعَٰقِبَةُ لِلۡمُتَّقِينَ

Transliteration: (Qaala Moosaa liqawmihis ta'eenoo billaahi wasbiroo innal arda lillaahi yoorisuhaa mai yashaaa'u min 'ibaadihee wal 'aaqibatu lilmuttaqeen)

मूसा ने अपनी क़ौम से कहा: "अल्लाह से मदद माँगो और सब्र करो [267]। बेशक ज़मीन अल्लाह ही की है, वह अपने बन्दों में से जिसे चाहे इसका वारिस बना देता है। और आख़िरत का अंजाम तो परहेज़गारों के लिए है [268]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 128 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ'राफ़ – आयत 128 की तफ़्सीर

✅ [267] सितम के वक़्त सब्र और अल्लाह से मदद

  • जब बनी इसराईल को मालूम हुआ कि फिरऔन उनके बेटों को क़त्ल करने लगेगा, तो वे सख़्त डर और बेचैनी में पड़ गए।
  • अब यह पहले जैसी वजह (मूसा अलैहिस्सलाम की पैदाइश रोकना) न थी, बल्कि सिर्फ़ अपनी बादशाही और घमंड बनाए रखने के लिए था।
  • इसी नाउम्मीदी के वक़्त हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने उन्हें सब्र और अल्लाह की मदद तलब करने का हुक्म दिया।
  • यानी ज़ालिम का दौर चाहे कितना भी लंबा हो, आखिरकार अल्लाह का इंसाफ़ ही ग़ालिब होता है।

✅ [268] ज़मीन अल्लाह की है, ज़ालिमों की नहीं

  • हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को तसल्ली दी कि ज़मीन और ताक़त अल्लाह की मिल्कियत है, और वह जिसे चाहे हुकूमत अता करता है।
  • अगर वे साबिर और मुत्तक़ी रहे, तो एक दिन वही मिस्र के मालिक बनेंगे।
  • फिरऔन ने अपनी ज़िंदगी के 400 साल में से 320 साल आसाइश और बादशाही में गुज़ारे, लेकिन आखिरकार अल्लाह के अजाब ने उसे आ लिया।
  • यह आयत सिखाती है कि अंतिम कामयाबी हमेशा मुत्तक़ियों की होती है, न कि ज़ालिमों की।

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