Transliteration: (Qaalaa Rabbanaa zalamnaaa anfusanaa wa illam taghfir lanaa wa tarhamnaa lanakoonanna minal khaasireen)
इससे दो अहम बातें सामने आती हैं:
तौबा और मग़फ़िरत की दुआ करना, यह हमारे जद्द-ए-अमजद हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) की मुल्की विरासत है। हमें, उनकी औलाद होने के नाते, इसे अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाना चाहिए।
ग़लती और गुनाह का जिम्मा शैतान के बहकावे पर डालना चाहिए, जबकि नेकी और भलाई को अल्लाह तआला की रहमत से जोड़ना चाहिए — यही रसूलुल्लाह ﷺ की सुन्नत और तरीका है।
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