कुरान - 7:23 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

23
قَالَا رَبَّنَا ظَلَمۡنَآ أَنفُسَنَا وَإِن لَّمۡ تَغۡفِرۡ لَنَا وَتَرۡحَمۡنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ ٱلۡخَٰسِرِينَ

Transliteration: (Qaalaa Rabbanaa zalamnaaa anfusanaa wa illam taghfir lanaa wa tarhamnaa lanakoonanna minal khaasireen)

दोनों ने कहा: ऐ हमारे रब! हमने अपने ऊपर ज़ुल्म किया, और अगर तू हमें माफ़ न करेगा और रहमत न फरमाएगा, तो हम यक़ीनन घाटा उठाने वालों में से हो जाएंगे [43] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 23 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-आ'राफ़ – आयत 23 की तफ़्सीर

 

✅ [43] तौबा – हज़रत आदम की विरासत है

इससे दो अहम बातें सामने आती हैं:
तौबा और मग़फ़िरत की दुआ करना, यह हमारे जद्द-ए-अमजद हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) की मुल्की विरासत है। हमें, उनकी औलाद होने के नाते, इसे अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाना चाहिए।
ग़लती और गुनाह का जिम्मा शैतान के बहकावे पर डालना चाहिए, जबकि नेकी और भलाई को अल्लाह तआला की रहमत से जोड़ना चाहिए — यही रसूलुल्लाह ﷺ की सुन्नत और तरीका है।

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