कुरान - 7:40 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

40
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا وَٱسۡتَكۡبَرُواْ عَنۡهَا لَا تُفَتَّحُ لَهُمۡ أَبۡوَٰبُ ٱلسَّمَآءِ وَلَا يَدۡخُلُونَ ٱلۡجَنَّةَ حَتَّىٰ يَلِجَ ٱلۡجَمَلُ فِي سَمِّ ٱلۡخِيَاطِۚ وَكَذَٰلِكَ نَجۡزِي ٱلۡمُجۡرِمِينَ

Transliteration: (Innal lazeena kazzaboo bi Aayaatinaa wastakbaroo 'anhaa laa tufattahu lahum abwaabus samaaa'i wa laa yadkhuloonal jannata hattaa yalijal jamalu fee sammil khiyaat; wa kazaalika najzil mujrimeen)

बेशक जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया और उनसे तकब्बुर किया, उनके लिए आसमान के दरवाज़े हरगिज़ नहीं खोले जाएंगे और न वे जन्नत में दाख़िल होंगे जब तक कि ऊंट सुई के नाके (सुराख़) से न गुज़र जाए; और हम मुजरिमों को ऐसा ही बदला देते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 40 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 40

✅ सुई के नाके से ऊंट का गुज़रना

काफ़िरों और मुतशद्दिद मुनकिरीन की रूहों के लिए आसमान के दरवाज़े नहीं खुलेंगे और उनका जन्नत में जाना ऐसा ही ना-मुमकिन है जैसे सुई के बारीक सुराख़ से मोटे ऊंट का निकल जाना।

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