कुरान - 7:42 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

42
وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ لَا نُكَلِّفُ نَفۡسًا إِلَّا وُسۡعَهَآ أُوْلَـٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلۡجَنَّةِۖ هُمۡ فِيهَا خَٰلِدُونَ

Transliteration: (Wallazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati laa nukallifu nafsan illaa wus'ahaaa ulaaa'ika Ashaabul jannati hum feehaa khaalidoon)

और जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक आमाल किए—हम किसी जान पर उसकी ताक़त से ज़्यादा बोझ नहीं डालते—यही लोग जन्नत वाले हैं; वे उसमें हमेशा रहेंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 42 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 42

✅ अहले जन्नत और शरीअत की आसानी

अल्लाह ने इंसान को उसकी वसाइल व ताक़त के मुताबिक़ ही अहकाम दिए हैं; ईमान और नेक अमल करने वाले जन्नत की दाइमी नेअमतों के हक़दार हैं।

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