कुरान - 7:44 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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وَنَادَىٰٓ أَصۡحَٰبُ ٱلۡجَنَّةِ أَصۡحَٰبَ ٱلنَّارِ أَن قَدۡ وَجَدۡنَا مَا وَعَدَنَا رَبُّنَا حَقّٗا فَهَلۡ وَجَدتُّم مَّا وَعَدَ رَبُّكُمۡ حَقّٗاۖ قَالُواْ نَعَمۡۚ فَأَذَّنَ مُؤَذِّنُۢ بَيۡنَهُمۡ أَن لَّعۡنَةُ ٱللَّهِ عَلَى ٱلظَّـٰلِمِينَ

Transliteration: (Wa naadaa Ashaabul jannati ashaaban Naari an qad wajadnaa maa wa'adannaa Rabbunaa haqqan fahal wajattum maa wa'ada Rabbukum haqqan qaaloo na'am; fa azzana mu'azzinum bainahum al la'natul laahi 'alaz zaalimeen)

और जन्नत वाले दोज़ख़ वालों को पुकार कर कहेंगे: 'बेशक हमने पा लिया जो वादा हमारे रब ने हमसे सच्चा किया था, तो क्या तुमने भी वह वादा पा लिया जो तुम्हारे रब ने सच्चा किया था?' वे कहेंगे: 'हां!'; फिर उनके दरमियान एक पुकारने वाला पुकार कर कहेगा: 'ज़ालिमों पर अल्लाह की लानत हो!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 44

✅ जन्नतियों और दोज़ख़ियों का मुकालमा

जन्नत वाले जहन्नमियों से पूछेंगे कि क्या अल्लाह के वादे और अज़ाब की वईद सच साबित हुई? वे लाचारी में इक़रार करेंगे, और ज़ालिमों पर लानत का एलान होगा।

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