कुरान - 7:46 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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وَبَيۡنَهُمَا حِجَابٞۚ وَعَلَى ٱلۡأَعۡرَافِ رِجَالٞ يَعۡرِفُونَ كُلَّۢا بِسِيمَىٰهُمۡۚ وَنَادَوۡاْ أَصۡحَٰبَ ٱلۡجَنَّةِ أَن سَلَٰمٌ عَلَيۡكُمۡۚ لَمۡ يَدۡخُلُوهَا وَهُمۡ يَطۡمَعُونَ

Transliteration: (Wa bainahumaa hijaab; wa 'alal A'raafi rijaaluny ya'rifoona kullam biseemaahum; wa naadaw Ashaabal jannati an salaamun 'alaikum; lam yadkhuloohaa wa hum yatma'oon)

और उन दोनों (जन्नत व दोज़ख़) के दरमियान एक पर्दा (हिजाब) होगा, और आअराफ़ (ऊंची दीवार) पर कुछ लोग होंगे जो हर एक को उनके चेहरों की अलामतों से पहचान लेंगे; और वे जन्नत वालों को पुकार कर कहेंगे: 'तुम पर सलामती हो!'; वे अभी उसमें दाख़िल नहीं हुए होंगे हालांकि वे इसकी उम्मीद रखते होंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 46

✅ अस्हाबुल आअराफ़ का मक़ाम

आअराफ़ जन्नत और दोज़ख़ के दरमियान एक बुलंद फ़सील (दीवार) है जिस पर वे लोग होंगे जिनकी नेकियां और बदियां बराबर होंगी; वे जन्नत वालों को पहचान कर सलाम करेंगे।

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