कुरान - 7:49 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

49
أَهَـٰٓؤُلَآءِ ٱلَّذِينَ أَقۡسَمۡتُمۡ لَا يَنَالُهُمُ ٱللَّهُ بِرَحۡمَةٍۚ ٱدۡخُلُواْ ٱلۡجَنَّةَ لَا خَوۡفٌ عَلَيۡكُمۡ وَلَآ أَنتُمۡ تَحۡزَنُونَ

Transliteration: (A haaa'ulaaa'il lazeena aqsamtum laa yanaaluhumul laahu bi rahmah; udkhulul Jannata laa khawfun 'alaikum wa laaa antum tahzanoon)

'क्या ये वही लोग हैं जिनके बारे में तुम क़समें खाते थे कि अल्लाह उन पर अपनी रहमत न फ़रमाएगा? (ऐ अहले ईमान!) जन्नत में दाख़िल हो जाओ, न तुम पर कोई ख़ौफ़ है और न तुम ग़मगीन होगे।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 49 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 49

✅ कमज़ोर मोमिनों का आला मक़ाम

दुनिया में काफ़िर जिन ग़रीब मोमिनों (जैसे बिलाल, सुहैब, अम्मार रज़ि.) का मज़ाक़ उड़ाते थे, आख़िरत में अल्लाह उन्हें जन्नत का वारिस बनाकर मुनकिरीन को रुस्वा फ़रमाएगा।

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