कुरान - 7:51 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
ٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُواْ دِينَهُمۡ لَهۡوٗا وَلَعِبٗا وَغَرَّتۡهُمُ ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَاۚ فَٱلۡيَوۡمَ نَنسَىٰهُمۡ كَمَا نَسُواْ لِقَآءَ يَوۡمِهِمۡ هَٰذَا وَمَا كَانُواْ بِـَٔايَٰتِنَا يَجۡحَدُونَ

Transliteration: (Allazeenat takhazoo deenahum lahwanw wa la'i-banw wa gharrat humul hayaatud dunyaa; fal Yawma nannsaahum kamaa nasoo liqaaa'a Yawmihim haazaa wa maa kaanoo bi aayaatinaa yajhadoon)

'जिन्होंने अपने दीन को खेल और तमाशा बना लिया था और दुनियावी ज़िंदगी ने उन्हें धोके में डाल रखा था'; पस आज हम उन्हें भुला देंगे जैसा कि वे अपने इस दिन की मुलाक़ात को भूले रहे और हमारी आयतों का इनकार करते रहे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 51

✅ दीन को खेल-तमाशा बनाने की सज़ा

जिन्होंने ज़िंदगी को महज़ दुनियावी अय्याशी और खेल-कूद समझा और आख़िरत को भुला दिया, आज क़यामत के दिन अल्लाह उन्हें अपनी रहमत से महरूम फ़रमा देगा।

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