Transliteration: (Falanaqussanna 'alaihim bi'ilminw wa maa kunnaa ghaaa'ibeen)
इसका मतलब यह है कि क़ियामत के दिन काफ़िरों और पैग़म्बरों से अल्लाह का सवाल करना इस लिए होगा कि मामला एक क़ानूनी प्रक्रिया के तहत पूरा हो, न कि इसलिए कि अल्लाह को हक़ीक़त का इल्म न हो। इससे यह भी सबक़ मिलता है कि हज़रत आयशा सिद्दीका (रज़ि.) पर इल्ज़ाम के मामले में नबी ﷺ ने जो तहक़ीक़ की थी, वह भी सिर्फ़ उम्मत की तालीम और मार्गदर्शन के लिए एक प्रक्रिया थी।
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