Transliteration: (Wa man khaffat mawaazeenuhoo fa ulaaa'ikal lazeena khasirooo anfusahum bimaa kaanoo bi Aayaatinaa yazlimoon)
कुछ उलमा का कहना है कि सिर्फ़ उन्हीं लोगों के आमाल तौले जाएँगे जिनके पास नेकियाँ भी हों और गुनाह भी। ऐसे मामलों में आमाल का आमाल से तुलनात्मक वजन होगा। काफ़िरों के लिए आमाल का तौल नहीं होगा, जैसा कि अल्लाह तआला फ़रमाता है: "हम उनके लिए क़ियामत के दिन कोई वजन क़ायम न करेंगे" (सूरा कहफ़: आयत 105)। इसी तरह अन्बिया के आमाल भी नहीं तौले जाएँगे, क्योंकि उनका अज्र बेहिसाब है (सूरा ग़ाफ़िर: आयत 39)। काफ़िरों के पास नेकियाँ नहीं होंगी और अन्बिया के पास गुनाह नहीं।
एक रिवायत में यह भी है कि काफ़िरों के आमाल भी तौले जाएँगे, और यह आयत उसी की दलील है। उनकी नेकियों के पलड़े में उनकी सदक़ात रखी जाएँगी, लेकिन उनका कोई वजन न होगा, क्योंकि नेकियों का वजन ईमान और ख़लूस से होता है।
यानी उन्होंने हमारे अज़ाब और हिसाब-किताब की चेतावनी को झुठलाया। इनकी ज़्यादतियों में शामिल था हक़ का इंकार, अल्लाह की निशानियों का मज़ाक़ उड़ाना, और तकब्बुर में हिदायत को ठुकराना। नतीजतन उनका आत्मा घाटे में पड़ा, क्योंकि उन्होंने जानबूझकर अल्लाह की साफ़-साफ़ निशानियों और अंजाम की चेतावनी को ठुकरा दिया।
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