Transliteration: (Walwaznu Yawma'izinil haqq; faman saqulat mawaa zeenuhoo fa-ulaaa'ika humul muflihoon)
क़ियामत के दिन अच्छे और बुरे आमाल तौले जाएँगे। कहीं मोती और याकूत की शक्ल में, कहीं आमाल के पुलिंदे तौले जाएँगे। इसमें कोई विरोध नहीं। लेकिन याद रहे, अल्लाह और उसके हबीब ﷺ से दिल की मुहब्बत तौली नहीं जाएगी, क्योंकि यह अमल नहीं बल्कि दिल की कैफ़ियत है। इसी तरह नबी ﷺ के आमाल भी तौले नहीं जाएँगे, क्योंकि उनका वजन कोई तराज़ू उठा ही नहीं सकता, जैसे दुनिया का तराज़ू समंदर का पानी या हवाओं को नहीं तौल सकता। नबी ﷺ का मुबारक नाम इतना भारी है कि अल्लाह के इज़्न से वह लाखों गुनहगारों के गुनाहों के पुलिंदों का बोझ हल्का कर देगा।
क़ियामत के दिन तराज़ू का ऊपर उठना उसके भारी होने की निशानी होगा, और नीचे गिरना आमाल के हल्केपन की वजह से होगा। क्योंकि आम तौर पर भौतिक चीज़ें नीचे गिरती हैं, और पाक व नेक चीज़ें ऊपर उठती हैं। जैसा कि अल्लाह तआला फ़रमाता है: "उसकी तरफ़ पाक कलिमे (बातें) बुलंद होती हैं।" (सूरा फ़ातिर: आयत 9)
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