कुरान - 7:10 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
وَلَقَدۡ مَكَّنَّـٰكُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَجَعَلۡنَا لَكُمۡ فِيهَا مَعَٰيِشَۗ قَلِيلٗا مَّا تَشۡكُرُونَ

अनुवाद -

और बेशक, हमने तुम्हें ज़मीन में जमाया [13] और उसमें तुम्हारे लिए रोज़ी के साधन बनाए [14], लेकिन तुम बहुत ही कम शुक्र अदा करते हो।

सूरह अल-आराफ आयत 10 तफ़सीर


📖 सूरा अल-आ'राफ़ – आयत 10 की तफ़्सीर

 

✅ [13] इंसान का ठिकाना ज़मीन है, आसमान नहीं

इससे मालूम हुआ कि इंसान का असली मक़ाम ज़मीन है। इंसान का कुछ देर हवा में उड़ना, नबी ﷺ का मेराज में आसमानों तक जाना या हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) का चौथे आसमान पर रहना—ये सब अस्थायी हैं। इसलिए इस आयत से हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के आसमान पर जाने का इन्कार साबित नहीं होता, क्योंकि उनका ठहरना भी वैसा ही अस्थायी है जैसे कोई इंसान कुछ दिन समंदर में या हवा में सफ़र करता है।

✅ [14] ज़मीन में रोज़ी के तमाम ज़रिए मौजूद हैं

ऐ इंसान! हमने तुम्हारे लिए ज़मीन पर ख़ुराक़, पानी, हवा और धूप मुहैया कर दिए ताकि तुम्हें न तो आसमान जाना पड़े और न ही समंदर में उतरना पड़े। सब ज़रूरतें तुम्हें ज़मीन पर ही मिलती हैं, लेकिन अफ़सोस कि तुम बहुत कम शुक्रगुज़ार होते हो।

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