कुरान - 7:85 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

85
وَإِلَىٰ مَدۡيَنَ أَخَاهُمۡ شُعَيۡبٗاۚ قَالَ يَٰقَوۡمِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنۡ إِلَٰهٍ غَيۡرُهُۥۖ قَدۡ جَآءَتۡكُم بَيِّنَةٞ مِّن رَّبِّكُمۡۖ فَأَوۡفُواْ ٱلۡكَيۡلَ وَٱلۡمِيزَانَ وَلَا تَبۡخَسُواْ ٱلنَّاسَ أَشۡيَآءَهُمۡ وَلَا تُفۡسِدُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ بَعۡدَ إِصۡلَٰحِهَاۚ ذَٰلِكُمۡ خَيۡرٞ لَّكُمۡ إِن كُنتُم مُّؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Wa ilaa Madyana akhaahum Shu'aybaa; qaala yaa qawmi' budul laaha maa lakum min ilaahin ghairuhoo qad jaaa'atkum baiyinatum mir Rabbikum fa awful kaila walmeezaana wa laa tabkhasun naasa ashyaa'ahum wa laa tufsidoo fil ardi ba'da islaahihaa; zaalikum khairul lakum in kuntum mu'mineen)

और मदयन की तरफ़ उनके भाई शुऐब को भेजा; उन्होंने कहा: 'ऐ मेरी क़ौम! अल्लाह की इबादत करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई माबूद नहीं; बेशक तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ़ से खुली निशानी आ चुकी है; पस नाप और तौल पूरा-पूरा करो और लोगों को उनकी चीज़ें कम करके न दो और ज़मीन में उसकी इस्लाह के बाद फ़साद न फैलाओ; यह तुम्हारे हक़ में बेहतर है अगर तुम ईमान रखते हो।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 85 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 85

✅ हज़रत शुऐब (अलै.) और नाप-तौल में कमी की मुमानअत

हज़रत शुऐब (अलै.) ने तौहीद के साथ-साथ तिजारत में दयानतदारी, नाप-तौल पूरा करने और ग्राहकों का हक़ न मारने की ताकीद फ़रमाई।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now