कुरान - 7:89 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

89
قَدِ ٱفۡتَرَيۡنَا عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًا إِنۡ عُدۡنَا فِي مِلَّتِكُم بَعۡدَ إِذۡ نَجَّىٰنَا ٱللَّهُ مِنۡهَاۚ وَمَا يَكُونُ لَنَآ أَن نَّعُودَ فِيهَآ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ رَبُّنَاۚ وَسِعَ رَبُّنَا كُلَّ شَيۡءٍ عِلۡمًاۚ عَلَى ٱللَّهِ تَوَكَّلۡنَاۚ رَبَّنَا ٱفۡتَحۡ بَيۡنَنَا وَبَيۡنَ قَوۡمِنَا بِٱلۡحَقِّ وَأَنتَ خَيۡرُ ٱلۡفَٰتِحِينَ

Transliteration: (Qadif tarainaa 'alal laahi kaziban in 'udnaa fee millatikum ba'da iz najjaanal laahu minhaa; wa maa yakoonu lanaaa an na'ooda feehaaa illaaa ai yashaaa'al laahu Rabbunaa; wasi'a Rabbunaa kulla shai'in 'ilmaa; 'alal laahi tawakkalnaa; Rabbanaf tah bainanaa wa baina qawminaa bilhaqqi wa Anta khairul faatiheen)

'हमने अल्लाह पर झूठा बोहतान बांधा होगा अगर हम तुम्हारे दीन में लौटें इसके बाद कि अल्लाह ने हमें उससे नजात बख़्शी; और हमारे लिए यह मुमकिन नहीं कि हम उसमें लौटें सिवाय इसके कि हमारा रब अल्लाह ही ऐसा चाहे; हमारे रब का इल्म हर चीज़ को घेरे हुए है; हमने अल्लाह ही पर भरोसा किया; ऐ हमारे रब! हमारे और हमारी क़ौम के दरमियान हक़ के साथ फ़ैसला फ़रमा दे, और तू सबसे बेहतर फ़ैसला करने वाला है।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 89 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 89

✅ कुफ़्र से नफ़रत और फ़ैसले की दुआ

हज़रत शुऐब (अलै.) ने कुफ़्र में वापस जाने से साफ़ इनकार किया, अल्लाह पर कामिल तवक्कुल जताया और अल्लाह से हक़ के फ़ैसले की दुआ की।

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