कुरान - 7:93 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

93
فَتَوَلَّىٰ عَنۡهُمۡ وَقَالَ يَٰقَوۡمِ لَقَدۡ أَبۡلَغۡتُكُمۡ رِسَٰلَٰتِ رَبِّي وَنَصَحۡتُ لَكُمۡۖ فَكَيۡفَ ءَاسَىٰ عَلَىٰ قَوۡمٖ كَٰفِرِينَ

Transliteration: (Fatawalla 'anhum wa qaala yaa qawmi laqad ablaghtukum Risaalaati Rabbee wa nasahtu lakum fakaifa aasaa'alaa qawmin kaafireen)

तो शुऐब ने उनसे मुंह फेर लिया और कहा: 'ऐ मेरी क़ौम! बेशक मैंने तुम्हें अपने रब के पैग़ामात पहुंचा दिए थे और तुम्हारी ख़ैरख़्वाही की थी, तो मैं काफ़िर क़ौम पर कैसे अफ़सोस करूं?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 93 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 93

✅ हुज्जत तमाम होने के बाद रुख़्सती

हज़रत शुऐब (अलै.) ने अपनी तबलीग़ का फ़रीज़ा पूरा किया और फ़रमाया कि जब तुमने हठधर्मी से कुफ़्र चुना तो अब तुम्हारे अंजाम पर कोई अफ़सोस नहीं।

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