कुरान - 7:95 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

95
ثُمَّ بَدَّلۡنَا مَكَانَ ٱلسَّيِّئَةِ ٱلۡحَسَنَةَ حَتَّىٰ عَفَواْ وَّقَالُواْ قَدۡ مَسَّ ءَابَآءَنَا ٱلضَّرَّآءُ وَٱلسَّرَّآءُ فَأَخَذۡنَٰهُم بَغۡتَةٗ وَهُمۡ لَا يَشۡعُرُونَ

Transliteration: (Summa baddalnaa makaa nas saiyi'atil hasanata hattaa 'afaw wa qaaloo qad massa aabaa'anad darraaa'u wassarraaa'u fa akhaznaahum baghtatanw wa hum laa yash'uroon)

फिर हमने तकलीफ़ की जगह ख़ुशहाली बदल दी, यहां तक कि वे ख़ूब बढ़े-फूले और कहने लगे: 'हमारे बाप-दादा को भी तकलीफ़ और राहत पहुंची थी'; तो हमने उन्हें अचानक पकड़ लिया और उन्हें ख़बर भी न थी। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 95 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 95

✅ इस्तेदराज: अचानक पकड़

जब लोग आज़माइश से सबक़ नहीं सीखते तो अल्लाह उन्हें मुहलत और ख़ुशहाली देता है; फिर जब वे ग़फ़लत में डूब जाते हैं तो अचानक अज़ाब में पकड़ लेता है।

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