कुरान - 7:96 सूरह अल-आराफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

96
وَلَوۡ أَنَّ أَهۡلَ ٱلۡقُرَىٰٓ ءَامَنُواْ وَٱتَّقَوۡاْ لَفَتَحۡنَا عَلَيۡهِم بَرَكَٰتٖ مِّنَ ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِ وَلَٰكِن كَذَّبُواْ فَأَخَذۡنَٰهُم بِمَا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ

Transliteration: (Wa law anna ahlal quraaa aamanoo wattaqaw lafatahnaa 'alaihim barakaatim minas samaaa'i wal ardi wa laakin kazzaboo fa akhaznaahum bimaa kaanoo yaksiboon)

और अगर उन बस्तियों के रहने वाले ईमान ले आते और तक़्वा इख़्तियार करते, तो हम उन पर आसमान और ज़मीन से बरकतों के दरवाज़े खोल देते; लेकिन उन्होंने झुठलाया, तो हमने उन्हें उनकी बद-आमालियों के सबब पकड़ लिया। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-आराफ आयत 96 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-आअराफ़ - आयत 96

✅ ईमान व तक़्वा से बरकतों का नुज़ूल

यह आयत मुआशी और रूहानी बरकत का अज़ीम उसूल बताती है: जब कोई क़ौम ईमान और तक़्वा अपनाती है तो आसमान से रहमतें और ज़मीन से ख़ज़ाने उबल पड़ते हैं।

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