कुरान - 2:154 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

154
وَلَا تَقُولُواْ لِمَن يُقۡتَلُ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ أَمۡوَٰتُۢۚ بَلۡ أَحۡيَآءٞ وَلَٰكِن لَّا تَشۡعُرُونَ

Transliteration: (Wa laa taqooloo limai yuqtalu fee sabeelil laahi amwaat; bal ahyaaa'unw wa laakil laa tash'uroon)

154. "और जो लोग अल्लाह के रास्ते में मारे गए, उनके बारे में मत कहो कि वे मरे हुए हैं [325]। बल्कि वे ज़िंदा हैं, लेकिन तुम नहीं समझते [328]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 154 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[325] शहादत और हमेशा की ज़िंदगी की नेमत

  • इस आयत का ताल्लुक़ शहीदों (martyrs) से है — यानी वो लोग जो अल्लाह के रास्ते में अपनी जान कुर्बान करते हैं।
  • कुछ लोग ये सोचते थे कि शहादत से इंसान की ज़िंदगी खत्म हो जाती है, मगर अल्लाह ने इस आयत में साफ़ फ़रमा दिया कि शहीद मरते नहीं, बल्कि उन्हें एक और ऊँची ज़िंदगी मिलती है।
  • ये एक अलौकिक (extraordinary) ज़िंदगी है, जिसे आम लोग नहीं समझ सकते।

[326] शहीदों का दर्जा और उनकी क़ीमत

  • वो मुसलमान जो अपने ईमान की हिफ़ाज़त करते हुए मारे जाते हैं, उन्हें शहीद कहा गया है।
  • लेकिन जो लोग दीन की हिफ़ाज़त में लड़ते हुए शहीद होते हैं, उनका मक़ाम (status) और भी ऊँचा होता है।
  • सब शहीदों को ज़िंदा रहने की नेमत मिलती है, लेकिन पैग़म्बरों की ज़िंदगी उनसे भी ऊँची और ख़ास होती है।

[327] "मरे हुए" कहने का मतलब क्या है

  • "मरे हुए" कहने से मुराद है कि उन्हें साधारण लोगों की तरह ना समझो — यानी जैसे आम मरने वाले होते हैं, वैसे नहीं।
  • सूरह आल-ए-इमरान (3:169) में भी अल्लाह फ़रमाता है:
    "जो लोग अल्लाह के रास्ते में मारे गए, उन्हें मरा हुआ मत समझो।"
  • शहीदों की मौत, दुनियावी मौत से अलग होती है — उनका एक रूहानी (spiritual) दर्जा होता है।

[328] शहीदों की अदृश्य (unseen) ज़िंदगी

  • शहीदों की ज़िंदगी हमारी आम समझ और दुनिया के क़ानूनों से बिलकुल अलग होती है।
  • उनकी हालत, आम मरने वालों जैसी नहीं होती — जैसे:
    • उनकी ज़िंदगियाँ क़ब्र में एक ख़ास दर्जे में जारी रहती हैं,
    • उनके ऊपर विरासत (inheritance) या बीवी की इद्दत के बाद शादी जैसे क़ानून नहीं लागू होते।
  • ये दिखाता है कि शहीदों को अल्लाह ने एक अलग मक़ाम और इज़्ज़त अता की है, जो आम इंसानों को हासिल नहीं।

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