कुरान - 2:201 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

201
وَمِنۡهُم مَّن يَقُولُ رَبَّنَآ ءَاتِنَا فِي ٱلدُّنۡيَا حَسَنَةٗ وَفِي ٱلۡأٓخِرَةِ حَسَنَةٗ وَقِنَا عَذَابَ ٱلنَّارِ

Transliteration: (Wa minhum mai yaqoolu rabbanaaa aatina fid dunyaa hasanatanw wa fil aakhirati hasanatanw wa qinaa azaaban Naar)

[201] "और उनमें से कुछ ऐसा कहते हैं: 'हे हमारे रब! हमें इस दुनिया और आने वाले जहां की भलाई दे, और हमें जहन्नम की आग के सज़ा से बचा।'" [472] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 201 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[472]

यह एक व्यापक दुआ है। यह ताक़तवर दुआ पूरी भलाई माँगती है: दुनिया और आख़िरत दोनों में भलाई, और जहन्नम की आग से सुरक्षा। यह एक सच्चे मुमिन के संतुलित नजरिए को दर्शाता है, जो केवल सांसारिक सफलता पर ध्यान नहीं देता। पैग़ंबर ﷺ अक्सर इस दुआ को पढ़ते थे, खासकर हज और अन्य महत्वपूर्ण इबादतों के दौरान।

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