कुरान - 2:204 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

204
وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يُعۡجِبُكَ قَوۡلُهُۥ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَيُشۡهِدُ ٱللَّهَ عَلَىٰ مَا فِي قَلۡبِهِۦ وَهُوَ أَلَدُّ ٱلۡخِصَامِ

Transliteration: (Wa minan naasi mai yu'jibuka qawluhoo fil hayaatid dunyaa wa yushhidul laaha 'alaa maa fee qalbihee wa huwa aladdulkhisaam)

204. "और कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनकी बातें तुम्हें दुनिया की ज़िंदगी के बारे में भली लगती हैं [477], और वह अपने दिल की बातों पर अल्लाह को गवाह बनाता है [478], हालाँकि वह सबसे ज़्यादा झगड़ालू है।" [479] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 204 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[477] दुनियावी बातों से दिल लुभाना, लेकिन अमल से खोखलापन

  • यह आयत एक मुनाफ़िक़ (पाखंडी) के बारे में है — जैसा कि अख़नस बिन शरीक़ के बारे में कहा जाता है।
  • वह रसूल ﷺ की महफ़िल में बहुत मीठी और तारीफ़ भरी बातें करता था, जिससे लोग प्रभावित होते थे।
  • लेकिन हक़ीक़त में वह नफ़रत, फ़साद (झगड़ा, नुकसान), और चालाकी से मुसलमानों को नुक़सान पहुँचाता था।
  • सीख: सिर्फ अच्छी बातें करना और दिल से न होना — ये नाफ़िक़त (मुनाफ़िक़ी) है।

[478] अल्लाह को झूठ पर गवाह बनाना — बड़ा गुनाह

  • वह आदमी अपने झूठ और चालाकी को छुपाने के लिए अल्लाह का नाम लेकर कसम खाता, और कहता कि उसके दिल में कोई बुरा इरादा नहीं।
  • कसम में झूठ बोलना, या अल्लाह के नाम का गलत इस्तेमाल करना — इस्लाम में कबीरा (बड़ा) गुनाह है।
  • आज भी लोग अक्सर झूठी कसमें खाकर दूसरों को धोखा देते हैं — यह आदत बहुत ख़तरनाक है।

[479] सबसे बड़ा झगड़ालू — मीठी बातें, लेकिन नीयत बुरी

  • वह आदमी बहस में सबसे आगे, और हर बात में तकरार करने वाला होता है।
  • वो सच्चाई छुपा कर, झूठी बातों से लोगों को गुमराह करता है।
  • असली पहचान इंसान के अमल (काम) से होती है, बातों से नहीं।
  • सीख: जो सिर्फ बातों से अच्छा लगे, मगर काम बुरे हों — उस पर भरोसा न करो।

नतीजा (सबक़):
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा ईमान सिर्फ जुबान से नहीं, बल्कि दिल से और अमल से होता है। जो लोग मीठी बातें कर के, अल्लाह का नाम ले कर, लोगों को धोखा देते हैं — वे अल्लाह के नज़दीक सबसे ख़राब हैं।
👉 "हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती" — लोगों को उनके अमल से पहचानो, बातों से नहीं।

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