कुरान - 2:206 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

206
وَإِذَا قِيلَ لَهُ ٱتَّقِ ٱللَّهَ أَخَذَتۡهُ ٱلۡعِزَّةُ بِٱلۡإِثۡمِۚ فَحَسۡبُهُۥ جَهَنَّمُۖ وَلَبِئۡسَ ٱلۡمِهَادُ

Transliteration: (Wa izaa qeela lahuttaqil laaha akhazathul izzatu bil-ism; fahasbuhoo jahannam; wa labi'sal mihaad)

"और जब उससे कहा जाए: 'अल्लाह से डर!', तो उसका घमंड उसे और ज़्यादा गुनाह करने पर मजबूर कर देता है। [480] ऐसे लोगों के लिए जहन्नुम काफ़ी है, और वह बहुत ही बुरा ठिकाना है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 206 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[480] घमंड जो गुनाहों को बढ़ा देता है

  • यहाँ उस मुनाफ़िक़ (पाखंडी) का ज़िक्र है जो जब इंसाफ़ और डर की नसीहत सुनता है, तो नम्रता की बजाय और भी अहंकार और बेज़ारी दिखाता है।
  • ऐसे लोग ग़लतियों को मानने से इनकार करते हैं, और शिक्षा या सुधार को नीचा समझते हैं।
  • जो बार-बार छोटी-छोटी गलतियाँ अपने घमंड की वजह से करते हैं, वे गलती धीरे-धीरे बड़ी बन जाती है।
  • सीख: घमंड से दिल कठोर हो जाता है, और इंसान अपने ही नुकसान में चलता है।

जहन्नुम — उनकी सज़ा और ठिकाना

  • ऐसे घमंडी और बाग़ी लोगों के लिए जहन्नुम (नरक) ही काफ़ी है — यानी उनकी सज़ा वहाँ पूरी हो जाएगी।
  • वह जगह है बहुत ही बुरी और दुखद, जहाँ से कोई भाग नहीं सकता।
  • यह अल्लाह की तरफ़ से एक सख़्त चेतावनी है कि घमंड और नासमझी का अंजाम बहुत भयानक होता है।

नतीजा (सबक़):
👉 जब कोई गलती बताई जाए तो उसे नम्रता से स्वीकार करना चाहिए, वरना घमंड इंसान को और ज़्यादा गुनाहों में फंसा देता है।
👉 घमंड करना और अल्लाह से डरने से इनकार करना, सीधे जहन्नुम की राह पर ले जाता है।
👉 इसलिए हमेशा दिल को नम्र रखो, और सुधार को खुले दिल से स्वीकार करो।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now