कुरान - 2:207 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

207
وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يَشۡرِي نَفۡسَهُ ٱبۡتِغَآءَ مَرۡضَاتِ ٱللَّهِۚ وَٱللَّهُ رَءُوفُۢ بِٱلۡعِبَادِ

Transliteration: (Wa minan naasi mai yashree nafsahub tighaaa'a mardaatil laah; wallaahu ra'oofum bil'ibaad)

और लोगों में कोई ऐसा भी है जो अल्लाह की रज़ा हासिल करने के लिए अपनी जान तक बेच डालता है; और अल्लाह अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 207 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-बक़रह - आयत 207

✅ रज़ा-ए-इलाही के लिए जानिसारी

यह आयत हज़रत सुहैब रूमी (रज़ि.) और हज़रत अली (रज़ि.) जैसे जांनिसार सहाबा की शान में नाज़िल हुई जिन्होंने हिजरत की रात और दीने हक़ के लिए अपना सारा माल और जान अल्लाह की रज़ा पर न्योछावर कर दी।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now