कुरान - 2:214 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

214
أَمۡ حَسِبۡتُمۡ أَن تَدۡخُلُواْ ٱلۡجَنَّةَ وَلَمَّا يَأۡتِكُم مَّثَلُ ٱلَّذِينَ خَلَوۡاْ مِن قَبۡلِكُمۖ مَّسَّتۡهُمُ ٱلۡبَأۡسَآءُ وَٱلضَّرَّآءُ وَزُلۡزِلُواْ حَتَّىٰ يَقُولَ ٱلرَّسُولُ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مَعَهُۥ مَتَىٰ نَصۡرُ ٱللَّهِۗ أَلَآ إِنَّ نَصۡرَ ٱللَّهِ قَرِيبٞ

Transliteration: (Am hasibtum an tadkhulul jannata wa lammaa yaa-tikum masalul lazeena khalaw min qablikum massathumul baasaaa'u waddarraaaa'u wa zulziloo hattaa yaqoolar Rasoolu wallazeena aamanoo ma'ahoo mataa nasrul laah; alaaa inna nasral laahi qareeb)

214. क्या तुम यह सोचते हो कि तुम जन्नत में बिना किसी परीक्षा के दाखिल हो जाओगे, जो तुमसे पहले गुज़र चुके लोगों पर आई नहीं थी? वे गरीबी और मुसीबतों में फंसे हुए थे और इतने हिल गए थे कि खुद रसूल और जो उसके साथ ईमान लाए थे, कहने लगे: "अल्लाह की मदद कब आएगी?" 499[500] बेशक, अल्लाह की मदद करीब है। [501] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 214 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

✅ [499] जीत से पहले की परीक्षा – खندق की लड़ाई से सीख
यह आयत खندق की लड़ाई के दौरान मुसलमानों की बहुत बड़ी मुश्किलों का ज़िक्र करती है, जहाँ उन्हें भूख, ठंड और डर सहना पड़ा।
🔹 यह आयत उन्हें तसल्ली और हिम्मत देने के लिए उतरी ताकि याद दिलाए कि परीक्षाएँ जन्नत की राह का हिस्सा हैं।

✅ [500] एक बेचैन पुकार जो दुआ में गिनी जाती है
"अल्लाह की मदद कब आएगी?" यह पुकार सहाबों ने बड़ी मुश्किल के समय लगाई थी—यह शक से नहीं, बल्कि गहरी बेचैनी से।
🔹 यह सिखाती है कि ऐसी बेचैन दुआ भी एक इबादत है, क्योंकि दुआ कई भावनात्मक रूपों में प्रकट हो सकती है।

✅ [501] इलाही यकीन: मदद हमेशा नजदीक है
अल्लाह की इस पुकार का जवाब सुकून और यकीन दिलाने वाला है:
🔹 "बेशक, अल्लाह की मदद करीब है!"
🔹 यह या तो सभी पैग़म्बरों और मुमिनों के लिए आम हौसला है, या खासकर प्यारे सहाबों के लिए वादा कि डरना नहीं—अल्लाह की मदद बहुत नज़दीक है।

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