234
وَٱلَّذِينَ يُتَوَفَّوۡنَ مِنكُمۡ وَيَذَرُونَ أَزۡوَٰجٗا يَتَرَبَّصۡنَ بِأَنفُسِهِنَّ أَرۡبَعَةَ أَشۡهُرٖ وَعَشۡرٗاۖ فَإِذَا بَلَغۡنَ أَجَلَهُنَّ فَلَا جُنَاحَ عَلَيۡكُمۡ فِيمَا فَعَلۡنَ فِيٓ أَنفُسِهِنَّ بِٱلۡمَعۡرُوفِۗ وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ خَبِيرٞ
234. और तुम में से जो लोग मर जाएं [572] और अपनी पत्नियाँ छोड़ जाएं, तो वे (विधवाएँ) चार महीने और दस दिन (की अवधि) तक इंतजार करें [573]। फिर जब वे अपनी इद्दत पूरी कर लें, तो तुम पर कोई दोष नहीं है कि वे अपने बारे में (इस्लामी कानून के अनुसार) जो कुछ करें [574]। और अल्लाह तुमसे जो कुछ करते हो, उससे पूरी तरह अवगत है [575]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)
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