कुरान - 2:25 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

25
وَبَشِّرِ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ أَنَّ لَهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِنْ تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ كُلَّمَا رُزِقُوا مِنْهَا مِنْ ثَمَرَةٍ رِزْقًا قَالُوا هَٰذَا الَّذِي رُزِقْنَا مِنْ قَبْلُ وَأُتُوا بِهِ مُتَشَابِهًا وَلَهُمْ أَزْوَاجٌ مُطَهَّرَةٌ وَهُمْ فِيهَا خَالِدُونَ

Transliteration: (Wa bashshiril lazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati anna lahum jannaatin tajree min tahtihal anhaaru kullamaa ruziqoo minhaa min samaratir rizqan qaaloo haazal lazee ruziqnaa min qablu wa utoo bihee mutashaabihaa, wa lahum feehaaa azwaajum mutahhara tunw wa hum feehaa khaalidoon)

25. और खुशख़बरी दो उन लोगों को जो ईमान लाए और अच्छे काम किए [47],
कि उनके लिए ऐसे बाग़ हैं जिनके नीचे नहरें बहती हैं।
जब भी उन्हें उनमें से कोई फल खाने को दिया जाएगा,
तो कहेंगे, "यह तो वही है जो हमें पहले भी दिया गया था" [48]
हालाँकि उन्हें (सिर्फ शक्ल में) मिलता-जुलता फल दिया गया होगा।
और वहाँ उनके लिए पाकीज़ा बीवियाँ होंगी [49],
और वे हमेशा वहीं रहेंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 25 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[47] जन्नत की कुंजी — पहले ईमान, फिर नेक अमल

👉 इस आयत से यह हक़ीक़त ज़ाहिर होती है:

  • पहले ईमान, फिर नेक अमल।
  • बिना ईमान के अमल क़बूल नहीं होते।
  • जो इंसान ईमान लाया और फिर मर गया (जैसे शहीद या बच्चे),
    वो भी जन्नत में जाएगा बिना अमल के, क्योंकि ईमान ही असली बुनियाद है।

👉 जन्नत में दाख़िला ईमान से मिलता है,
लेकिन जन्नत के दर्जे और इनाम इंसान के अमल पर निर्भर होते हैं।

[48] जन्नत के फल — दिखने में वही, स्वाद में अलगा

👉 लोग कहेंगे:
"ये फल तो वही लगते हैं जो हमें दुनिया में मिले थे",
मगर स्वाद और लज़्ज़त में बिलकुल अलग और बेहतर होंगे।

👉 इससे यह सबक़ मिलता है:
जन्नत की नेमतें भले दुनिया जैसी दिखें,
मगर उनकी हक़ीक़त कहीं ज़्यादा बेहतरीन और लुत्फ़ अ़ता करने वाली होगी।

[49] पाक बीवियाँ — दुनिया से और जन्नत की हूरें

👉 “पाक बीवियाँ” से मुराद:

  • दुनिया की ईमान वाली औरतें, जो अपने आख़िरी ईमान वाले शौहर के साथ मिलेंगी।
  • और जन्नत की हूरें, जो खास तौर पर इनसानों के लिए बनाई गई हैं।

👉 जन्नत में इंसानों और हूरों का रिश्ता एक इलाही नेमत होगा।
यह इस दुनिया के क़ानून से अलग है, जहाँ सिर्फ एक ही नस्ल के बीच निकाह होता है।

नतीजा:
यह आयत जन्नत की नेमतों, ईमान की अहमियत, नेक अमल की ज़रूरत,
और अल्लाह की रहमत का शानदार बयान है।

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