Transliteration: (Wa bashshiril lazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati anna lahum jannaatin tajree min tahtihal anhaaru kullamaa ruziqoo minhaa min samaratir rizqan qaaloo haazal lazee ruziqnaa min qablu wa utoo bihee mutashaabihaa, wa lahum feehaaa azwaajum mutahhara tunw wa hum feehaa khaalidoon)
👉 इस आयत से यह हक़ीक़त ज़ाहिर होती है:
👉 जन्नत में दाख़िला ईमान से मिलता है,
लेकिन जन्नत के दर्जे और इनाम इंसान के अमल पर निर्भर होते हैं।
👉 लोग कहेंगे:
"ये फल तो वही लगते हैं जो हमें दुनिया में मिले थे",
मगर स्वाद और लज़्ज़त में बिलकुल अलग और बेहतर होंगे।
👉 इससे यह सबक़ मिलता है:
जन्नत की नेमतें भले दुनिया जैसी दिखें,
मगर उनकी हक़ीक़त कहीं ज़्यादा बेहतरीन और लुत्फ़ अ़ता करने वाली होगी।
👉 “पाक बीवियाँ” से मुराद:
👉 जन्नत में इंसानों और हूरों का रिश्ता एक इलाही नेमत होगा।
यह इस दुनिया के क़ानून से अलग है, जहाँ सिर्फ एक ही नस्ल के बीच निकाह होता है।
नतीजा:
यह आयत जन्नत की नेमतों, ईमान की अहमियत, नेक अमल की ज़रूरत,
और अल्लाह की रहमत का शानदार बयान है।
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