Transliteration: (Innal laaha laa yastahyeee ai yadriba masalam maa ba'oodatan famaa fawqahaa; faammal lazeena aamanoo faya'lamoona annahul haqqu mir rabbihim wa ammal lazeena kafaroo fayaqooloona maazaaa araadal laahu bihaazaa masalaa; yudillu bihee kaseeranw wa yahdee bihee kaseeraa; wa maa yudillu biheee illal faasiqeen)
👉 मक्का के काफ़िरों ने कुरआन में दी गई छोटी मिसालों का मज़ाक उड़ाया —
जैसे मक्खी, मच्छर, मधुमक्खी वग़ैरह।
वे कहते थे: “क्या अल्लाह को सिर्फ यही उदाहरण देने को मिला?”
👉 इस आयत में अल्लाह ने जवाब दिया कि:
छोटी चीज़ भी अगर हक़ को ज़ाहिर करे, तो वह भी हिकमत से भरी होती है।
👉 इसी तरह,
👉 इस आयत से ये साबित होता है कि:
👉 इसका मिसाल यूँ समझिए:
👉 इसलिए,
👉 जो लोग फ़ासिक (सीमालंघन करने वाले) हैं,
यानी दिल से हठधर्मी, अहंकारी और नाफरमान हैं,
उन्हीं को कुरआन से गुमराही मिलती है।
नतीजा:
इस आयत में अल्लाह की हिकमत, मिसालों की अहमियत,
और कुरआन की हिदायत या गुमराही बनने की सच्चाई को बयान किया गया है —
और साथ ही ये साफ़ किया गया कि हिदायत पाने के लिए दिल की सच्चाई और रसूल ﷺ से मुहब्बत ज़रूरी है।
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