Transliteration: (Kaifa takfuroona billaahi wa kuntum amwaatan fa ahyaakum summa yumeetukum summa yuhyeekum summaa ilaihi turja'oon.)
👉 “मरे हुए थे” का मतलब है — तुम्हारे पैदा होने से पहले तुम बेजान थे,
कोई शक्ल, कोई ज़िंदगी, कोई पहचान नहीं थी।
👉 फिर अल्लाह ने तुम्हें ज़िंदगी दी,
ताकि तुम इस दुनिया में इम्तिहान के लिए जियो।
👉 उसके बाद, मौत आएगी,
यानी एक बार फिर से बेजान बना दिया जाएगा।
👉 फिर क़ियामत के दिन दोबारा ज़िंदा किया जाएगा,
ताकि तुम्हारे अमल का हिसाब-किताब हो।
👉 और आख़िर में — तुम्हें अल्लाह के सामने पेश होना है,
जहां सवाल-जवाब और इंसाफ़ होगा।
✅ तौहीद की दलील —
जब अल्लाह ही तुम्हारा खालिक़ (सिर्जनहार) है,
तो उसके इलावा किसी और को क्यों पूजते हो?
✅ ज़िंदगी एक इम्तिहान है —
यह दुनिया की ज़िंदगी सिर्फ़ एक अवधी है,
जिसमें अच्छे या बुरे अमल तय करते हैं कि
आख़िरत में इनाम मिलेगा या सज़ा।
✅ इंसान को घमंड नहीं करना चाहिए —
क्योंकि उसने अपनी ज़िंदगी खुद नहीं बनाई,
ना ही वह मौत या क़यामत को रोक सकता है।
✅ यह आयत याद दिलाती है कि एक दिन हर इंसान को
अपने रब के सामने हाज़िर होकर हिसाब देना है।
इसलिए अभी वक्त है सुधरने का और ईमान लाने का।
नतीजा:
अल्लाह ने इंसान को बेजान हालत से ज़िंदगी दी,
फिर मौत देगा, फिर ज़िंदा करेगा,
और अंत में अपने सामने पेश करेगा।
फिर भी अगर कोई इनकार करता है,
तो ये उसकी अकल और फितरत का घोर नुकसान है।
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