कुरान - 2:29 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
هُوَ ٱلَّذِي خَلَقَ لَكُم مَّا فِي ٱلۡأَرۡضِ جَمِيعٗا ثُمَّ ٱسۡتَوَىٰٓ إِلَى ٱلسَّمَآءِ فَسَوَّىٰهُنَّ سَبۡعَ سَمَٰوَٰتٖۚ وَهُوَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٞ

Transliteration: (Huwal lazee khalaqa lakum maa fil ardi jamee'an summas tawaaa ilas samaaa'i fasaw waahunna sab'a samaa waat; wa Huwa bikulli shai'in Aleem)

29. उसी ने तुम्हारे लिए वह सब कुछ पैदा किया जो ज़मीन में है [56]।
फिर वह आसमान की तरफ़ मुतवज्जे हुआ और उसे सात आसमानों में पूरी तरह बना दिया [57]।
और वह हर चीज़ को खूब जानने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[56] ज़मीन की हर चीज़ — इंसान के लिए

👉 इस आयत से एक अहम उसूल मालूम होता है:
इस्लाम में हर चीज़ असल में हलाल है, जब तक कोई चीज़ कुरान या हदीस से हराम साबित न हो।

✅ यानी जो कुछ ज़मीन में है —
फ़व्वारे, फल, जानवर, पौधे, खनिज —
सब इंसान के फ़ायदे के लिए बनाए गए हैं।

✅ यहां तक कि कोई हराम चीज़ भी अगर इंसान अल्लाह की ख़ुशनूदी के लिए छोड़ दे,
तो उसे उससे भी सवाब मिलता है।

[57] पहले ज़मीन का ज़िक्र क्यों, जबकि आसमान पहले बना?

👉 यहां "फिर" का मतलब वक़्ती तर्तीब (chronological order) नहीं है,
बल्कि बयान की तर्तीब (narrative order) है।

✅ असल में पहले आसमान बनाए गए, जैसा कि सुरह अन-नाज़िआत (79:30) में भी है:
“फिर उसने ज़मीन को बिछाया।”

👉 लेकिन यहां ज़मीन को पहले क्यों ज़िक्र किया गया?
क्योंकि:

  • ज़मीन ही वह जगह है जहां इंसानी ज़िंदगी का अमल होता है।
  • यहां नबियों का भेजा जाना,
  • क़ुरान का उतरना,
  • इम्तिहान और अमल का दौर —
    ये सब कुछ यहीं होता है।

✅ इसलिए ज़मीन का ज़िक्र अहमियत और मक़सद के लिहाज़ से पहले किया गया,
ना कि तख़लीक़ (creation) के वक़्त के लिहाज़ से।

आख़िर में — “उसे हर चीज़ का इल्म है”

✅ ये जुमला बताता है कि अल्लाह की तख़लीक़ बे-मक़सद नहीं,
हर चीज़ उसके इल्म, हिकमत और मर्ज़ी से होती है।

नतीजा:
अल्लाह ने ज़मीन की हर चीज़ इंसान की सेवा के लिए बनाई।
फिर उसने आसमानों को सात दर्जों में मुकम्मल किया।
और वह हर शै से वाक़िफ़ है —
इसलिए हमें भी उसी के हुक्मों पर चलना चाहिए,
क्योंकि हम उसी की मख़लूक़ हैं।

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