कुरान - 2:252 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

252
تِلۡكَ ءَايَٰتُ ٱللَّهِ نَتۡلُوهَا عَلَيۡكَ بِٱلۡحَقِّۚ وَإِنَّكَ لَمِنَ ٱلۡمُرۡسَلِينَ

Transliteration: (Tilka Aayaatul laahi natloohaa 'alaika bilhaqq; wa innaka laminal mursaleen)

252):
"यह अल्लाह की आयतें हैं जिन्हें (हे प्रियतम!) हम आपको सही-सही सुनाते हैं, और निश्चय ही आप रसूलों में से हैं।" [640] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 252 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[640] ईश्वरीय Revelation और नुबूवत की पुष्टि

  • इस आयत में अल्लाह ने यह स्पष्ट किया है कि जो आयतें प्रत्येक रूप से और सटीक रूप से नबी ﷺ को सुनाई जा रही हैं, वे सभी अल्लाह से प्रकट हुई हैं।
  • यह ईश्वरीय प्रकाशन की सत्यता और पवित्रता की पुष्टि करती है, और यह भी प्रमाणित करती है कि नबी ﷺ का स्थान रसूलों में अत्यंत उच्च है।
  • इस आयत में अल्लाह न केवल नबी ﷺ के प्रेषक (रसूल) होने की पुष्टि करता है, बल्कि उन आयतों की दिव्य सत्यता और उनका सही-सही प्रकट होना भी स्पष्ट करता है।

निष्कर्ष:
यह आयत नबी ﷺ के कर्तव्य और उनके प्रेषण (नुबूवत) की सत्यता को प्रकट करती है, यह बताती है कि अल्लाह द्वारा भेजी गई वाणी पूरी तरह सही और प्रमाणिक है। यह एक आधिकारिक घोषणापत्र है कि नबी ﷺ सचमुच अल्लाह के रसूल हैं और जो कुछ वे सुनाते हैं, वह ईश्वरीय सत्य है।

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