260. "और जब इब्राहीम (अ.स.) ने कहा: 'हे मेरे रब! मुझे दिखा कि आप मृतकों को कैसे जीवित करते हैं।' उसने (अल्लाह ने) कहा: 'क्या तुम यकीन नहीं करते?' उसने कहा: 'जी हां, लेकिन मैं चाहता हूँ कि मेरा दिल शांति से भर जाए।' उसने कहा: 'चार पक्षी ले आओ और उन्हें परिचित बना लो। फिर उनके हर हिस्से को एक-एक पहाड़ी पर रख दो। फिर उन्हें पुकारो। वे तुम्हारे पास दौड़ते हुए आ जाएंगे। और जान लो कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ुदरत रखने वाला और बेहद समझदार है।'" [677] [678] [679] [680] [681] [682]
[677] हज़रत इब्राहीम (अ.स.) की मुराद
[678] विश्वास से यक़ीन तक का सफर
[679] पक्षियों को परिचित करना
[680] मृतकों को बुलाना और आशीर्वाद प्राप्त करना
[681] चमत्कारी पुनर्जीवन
[682] इस घटना से शिक्षा
इस आयत से हमें यह समझने को मिलता है कि अल्लाह की शक्ति और समझ किसी भी चीज़ पर है, चाहे वह जीवन और मृत्यु हो। हज़रत इब्राहीम (अ.स.) का यह अनुभव इस बात का गवाह है कि सिर्फ विश्वास ही नहीं, बल्कि वास्तविक अनुभव भी आवश्यक है, ताकि व्यक्ति का विश्वास और ज्ञान सर्वोत्तम हो। यह एक बड़ा चमत्कारी अवसर था, जो ईश्वर के पूर्ण नियंत्रण और ताकत को दर्शाता है।
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सूरह अल-बक़रा आयत 260 तफ़सीर