कुरान - 2:38 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

38
قُلۡنَا ٱهۡبِطُواْ مِنۡهَا جَمِيعٗاۖ فَإِمَّا يَأۡتِيَنَّكُم مِّنِّي هُدٗى فَمَن تَبِعَ هُدَايَ فَلَا خَوۡفٌ عَلَيۡهِمۡ وَلَا هُمۡ يَحۡزَنُونَ

Transliteration: (Qulnah bitoo minhaa jamee 'an fa immaa ya'tiyannakum minnee hudan faman tabi'a hudaaya falaa khawfun 'alaihim wa laa hum yahza noon)

[38] फिर हमने कहा: "तुम सब के सब यहाँ से नीचे उतर जाओ, फिर जब मेरी तरफ़ से तुम्हारे पास कोई हिदायत आए, तो जो मेरी हिदायत की पैरवी करेंगे, उन्हें न कोई डर होगा और न वे ग़मगीन होंगे।" [76] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 38 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

🔹 [76] जो अल्लाह की हिदायत को मानेंगे, वे महफ़ूज़ रहेंगे

इस आयत में अल्लाह तआला ने साफ़ वादा किया है कि:

"जो मेरी भेजी हुई हिदायत को अपनाएगा, उसके लिए न डर है और न ग़म।"

✅ क़यामत के दिन, ऐसे लोग अल्लाह की रहमत में होंगे। उन्हें उस दिन के बड़े खौफनाक मंजर से भी कोई डर नहीं होगा, जैसा कि एक और आयत में है:

“वो बड़ी घबराहट उन्हें ग़मगीन नहीं करेगी।”
(Surah Al-Anbiya, 21:103)

✅ इस दुनिया में, जो लोग अल्लाह के रास्ते पर चलेंगे, उन्हें अंदरूनी सुकून और इत्मीनान मिलेगा।
हालाँकि दुनिया में परेशानियाँ हो सकती हैं, लेकिन उनका दिल ईमान और तवक़्कुल (भरोसे) से भरा होता है।

उदाहरण:
हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को साँप बनती लाठी देखकर डर महसूस हुआ। यह डर कुफ्र या शक का नहीं था, बल्कि एक इंसानी फितरी डर था। लेकिन उन्होंने अल्लाह की मदद से उस डर पर क़ाबू पाया।

➤ यह आयत हमें यह यकीन देती है कि अगर हम अल्लाह की हिदायत को थामे रहें, तो चाहे दुनिया हो या आख़िरत — हमें अल्लाह की हिफ़ाज़त, सुकून, और रहमत मिलेगी।

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