Transliteration: (Fatalaqqaaa Aadamu mir Rabbihee Kalimaatin fataaba 'alaihi; innahoo Huwat Tawwaabur Raheem)
यह "तौबा के अल्फ़ाज़" केवल वो मशहूर दुआ "हे हमारे रब! हमने अपने ऊपर ज़ुल्म किया..." नहीं थे, क्योंकि वह दुआ आदम अलैहिस्सलाम ने जन्नत से निकाले जाने से पहले की थी।
इस आयत में जिन अल्फ़ाज़ का ज़िक्र है, वो ख़ास तौबा के जुमले थे जो अल्लाह ने ख़ुद सिखाए — जिनमें अल्लाह से माफ़ी माँगते हुए हज़रत मुहम्मद ﷺ का वसीला भी शामिल था।
इससे पता चलता है कि नबी ﷺ का दर्जा और मक़ाम उनके आने से पहले ही बहुत ऊँचा और मुकर्रर था।
इसी मुबारक वसीले की वजह से हज़रत आदम की तौबा क़ुबूल हुई।
"तौّाब" (बहुत तौबा क़बूल करने वाला) नाम "तौबा" के उस मूल शब्द से लिया गया है, जिसका मतलब है "लौटना"।
इंसान के लिए इसका मतलब है: गुनाह से आज्ञाकारिता की तरफ़ लौट आना।
और अल्लाह के लिए इसका मतलब है: ग़ज़ब से रहमत की तरफ़ लौट आना — यानी रहमत का इज़हार करना।
सही तौबा के तीन ज़रूरी हिस्से होते हैं:
अगर इंसान इन शर्तों के साथ तौबा करता है, तो अल्लाह तआला अपनी बेहिसाब रहमत से उसे माफ़ कर देता है — जैसे आदम अलैहिस्सलाम की तौबा क़ुबूल की गई।
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