कुरान - 2:68 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

68
قَالُواْ ٱدۡعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا هِيَۚ قَالَ إِنَّهُۥ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٞ لَّا فَارِضٞ وَلَا بِكۡرٌ عَوَانُۢ بَيۡنَ ذَٰلِكَۖ فَٱفۡعَلُواْ مَا تُؤۡمَرُونَ

Transliteration: (Qaalud-'u lanaa rabbaka yubaiyil lanaa maa hee; qaala innahoo yaqoolu innahaa baqaratul laa faaridunw wa laa bikrun 'awaanum baina zaalika faf'aloo maa tu'maroon)

[68] उन्होंने कहा: "अपने रब से हमारे लिए दुआ करो कि वह हमें साफ़ बता दे कि वह कैसी (गाय) हो।" मूसा ने कहा: "अल्लाह फ़रमाता है कि वह न ज़्यादा बूढ़ी हो और न बहुत छोटी बछिया, बल्कि उन दोनों के बीच की हो। तो अब वही करो जो तुम्हें हुक्म दिया गया है।" [126] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 68 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[126] बेवजह सवालात से बचना

  • बनी इस्राईल ने अल्लाह के साफ़ हुक्म (गाय की क़ुर्बानी) पर सीधा अमल करने के बजाए बेवजह सवाल करने शुरू कर दिए।
  • उन्होंने कहा: "बताइए कैसी गाय?" — जबकि पहले ही उन्हें ज़बह करने को कहा गया था।

🔹 मूसा (अलैहिस्सलाम) ने जवाब दिया कि:

"वह गाय ना तो ज़्यादा बूढ़ी है और ना बहुत छोटी बछिया, बल्कि बीच की उम्र की है।"

  • फिर कहा गया: "तो अब वही करो जो हुक्म दिया गया है" — यानी अब ज़्यादा ना सोचो, बस हुक्म मानो।

🌟 सीख:

  • अल्लाह के हुक्म में बिना वजह की जाँच-पड़ताल करना नफ़ा नहीं बल्कि नुकसान देता है।
  • दीन के कामों में बहस, देरी, या शक करना बरकत को खत्म कर देता है।
  • जैसे मुरशिद या नबी जो हुक्म दें, उस पर बगैर बहस फ़ौरन अमल करना चाहिए।
  • बेवजह सवाल करने से काम मुश्किल और पेचीदा हो जाता है, और आख़िर में नुकसान ही होता है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now