कुरान - 2:69 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

69
قَالُواْ ٱدۡعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا لَوۡنُهَاۚ قَالَ إِنَّهُۥ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٞ صَفۡرَآءُ فَاقِعٞ لَّوۡنُهَا تَسُرُّ ٱلنَّـٰظِرِينَ

Transliteration: (Qaalud-'u lanaa Rabbaka yubaiyil lanaa maa lawnuhaa; qaala innahoo yaqoolu innahaa baqaratun safraaa'u faaqi'ul lawnuhaa tasurrunnaazireen)

[69] उन्होंने कहा: "अपने रब से हमारे लिए दुआ करो कि वह हमें साफ़ बता दे कि उसका रंग क्या है।" मूसा ने कहा: "अल्लाह फ़रमाता है कि वह एक पीली गाय है, जिसका रंग चमकदार है, जो देखने वालों को अच्छी लगती है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 69 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[69] हद से ज़्यादा सवाल करना और रंग की तफ़सील

  • बनी इस्राईल ने फिर से बेवजह सवाल किया: "उसका रंग क्या है?"
    यानी अब उम्र जानने के बाद भी तसल्ली नहीं हुई।
  • अल्लाह ने हुक्म दिया:
    • वह गाय पीले रंग की है
    • उसका रंग चमकदार (रोशन, तेज़) है
    • और वह देखने वालों को खूब पसंद आती है — यानी खूबसूरत और नज़र को भा जाने वाली गाय।

🌟 सीख:

  • यह आयत दिखाती है कि हर बार बेवजह पूछते रहने से काम आसान की बजाय मुश्किल हो जाता है।
  • अगर वो पहली बार में ही सादगी से हुक्म पर अमल कर लेते, तो इतनी तफ़सील और परेशानी ना होती।
  • अल्लाह का हुक्म हो या नबी की बात — उस पर फौरन अमल करना सबसे बेहतर तरीका है।
  • जो लोग हर बात को उलझाते हैं, वो अक्सर ख़ुद ही मुश्किल में पड़ जाते हैं।

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