कुरान - 2:71 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

71
قَالَ إِنَّهُۥ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٞ لَّا ذَلُولٞ تُثِيرُ ٱلۡأَرۡضَ وَلَا تَسۡقِي ٱلۡحَرۡثَ مُسَلَّمَةٞ لَّا شِيَةَ فِيهَاۚ قَالُواْ ٱلۡـَٰٔنَ جِئۡتَ بِٱلۡحَقِّۚ فَذَبَحُوهَا وَمَا كَادُواْ يَفۡعَلُونَ

Transliteration: (Qaala innahoo yaqoolu innahaa baqaratul laa zaloolun tuseerul arda wa laa tasqil harsa musallamatullaa shiyata feehaa; qaalul 'aana jita bilhaqq; fazabahoohaa wa maa kaado yaf'aloon)

[71] मूसा ने कहा: "अल्लाह फ़रमाता है कि वह ऐसी गाय हो जो न ज़मीन जोतने के लिए पालतू बनाई गई हो, न खेतों को पानी देने के लिए; वह एकदम बे-ऐब (बिलकुल सही-सलामत) हो, जिसमें कोई दाग़-धब्बा न हो।" [129] उन्होंने कहा: "अब तुमने सच कहा।" फिर उन्होंने उसे ज़बह किया, हालांकि वो ऐसा करना नहीं चाहते थे। [130] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 71 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[129] क़ुर्बानी के जानवर की ख़ूबियाँ और नेक औलाद की इनाम

  • अब आख़िरी बार जब सवाल किया गया, तो गाय की खास पहचान बताई गई:
    • न ज़मीन जोतने के काम की,
    • न खेतों को सींचने की आदी,
    • बिलकुल बे-ऐब, यानी कोई चोट, दाग़, कमी नहीं।
  • एक ही आदमी के पास ऐसी गाय थी। वह एक बहुत नेक और माँ की ख़िदमत करने वाला लड़का था।
  • उस गाय की क़ीमत सोने से भरी हुई चमड़ी तय की गई — यानि बहुत महँगी। यह इस बात की निशानी है कि:
    • जो औलाद माँ-बाप की सेवा करती है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में बड़ा इनाम देता है।

[130] आख़िरकार हुक्म मानना, लेकिन बेमन से

  • उन्होंने कहा: "अब तुमने सही बात बताई" — यानी अब कोई बहाना नहीं बचा।
  • फिर भी उन्होंने बेमन से, यानी मन से ना चाहते हुए, उस गाय को ज़बह किया।

🌟 यह बताता है:

  • अल्लाह का हुक्म हो तो उसे देर किए बग़ैर, पूरे दिल से मानना चाहिए।
  • बेमन से इबादत या अमल करने में बरकत नहीं होती।

🌿 सीखें:

  1. क़ुर्बानी के जानवर में ऐब नहीं होना चाहिए — यह ईमान की ख़ूबसूरती और नियत की पाकीज़गी को दिखाता है।
  2. माँ की सेवा अल्लाह के यहाँ बहुत ऊँचे दर्जे की बात है — उससे दुनिया और दीन दोनों में फ़ायदा मिलता है।
  3. अल्लाह के हुक्म को टालने या बहाने बनाने से काम मुश्किल हो जाता है — इसलिए जो हुक्म मिले, तुरंत और खुशी से उसे मानना चाहिए।

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