कुरान - 2:72 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

72
وَإِذۡ قَتَلۡتُمۡ نَفۡسٗا فَٱدَّـٰرَٰٔتُمۡ فِيهَاۖ وَٱللَّهُ مُخۡرِجٞ مَّا كُنتُمۡ تَكۡتُمُونَ

Transliteration: (Wa iz qataltum nafsan faddaara'tum feehaa wallaahu mukhrijum maa kuntum taktumoon)

[72] और (वो वक्त याद करो) जब तुमने एक आदमी को क़त्ल किया और उस बारे में आपस में झगड़ने लगे। लेकिन अल्लाह उस चीज़ को ज़ाहिर करने वाला था जिसे तुम छुपा रहे थे। [131] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-बक़रा आयत 72 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[131] क़त्ल, झगड़ा और छुपाई हुई सच्चाई

  • इस आयत में "तुमने क़त्ल किया" कहा गया है, हालाँकि क़त्ल एक आदमी ने किया था, मगर:
    • और लोग भी उसमें शामिल थे या
    • जानबूझ कर कातिल का साथ दे रहे थे, या
    • कातिल को छुपा रहे थे।
  • इसलिए अल्लाह ने सब को ज़िम्मेदार ठहराया और जमाअत (plural) में कहा "तुमने क़त्ल किया।"
  • इस तरह की बात उसी तरह है जैसे:
    • हम कहते हैं: "हमने 800 साल हुकूमत की", यानी हमारे बुज़ुर्गों ने।
    • यहां यहूदियों को उनके बाप-दादा के गुनाहों की याद दिलाई गई क्योंकि वो उनकी राह और रवैया अपना चुके थे।
  • छुपाई गई सच्चाई को अल्लाह ने ज़ाहिर कर दिया — यानी:
    • तुमने कोशिश की छुपाने की,
    • मगर हक़ीक़त सामने आकर रही क्योंकि अल्लाह हर राज़ जानता है और जब चाहे खोल सकता है।

🌿 सीखें:

  1. गुनाह अगर किसी एक का हो, लेकिन बाक़ी लोग उसे छुपाएं या मदद करें, तो वो भी ज़िम्मेदार ठहराए जाते हैं।
  2. अल्लाह की नज़र से कुछ भी छुपा नहीं है — जो लोग बुरे काम छुपाते हैं, एक दिन वो सब सामने आ जाता है।
  3. गुज़िश्ता क़ौमें अगर किसी गुनाह में डूबी रहीं, और उनकी औलादें उसी रास्ते पर चलीं, तो वो भी उसी अज़ाब के हक़दार होती हैं।

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