72
وَإِذۡ قَتَلۡتُمۡ نَفۡسٗا فَٱدَّـٰرَٰٔتُمۡ فِيهَاۖ وَٱللَّهُ مُخۡرِجٞ مَّا كُنتُمۡ تَكۡتُمُونَ
Transliteration: (Wa iz qataltum nafsan faddaara'tum feehaa wallaahu mukhrijum maa kuntum taktumoon)
[72] और (वो वक्त याद करो) जब तुमने एक आदमी को क़त्ल किया और उस बारे में आपस में झगड़ने लगे। लेकिन अल्लाह उस चीज़ को ज़ाहिर करने वाला था जिसे तुम छुपा रहे थे। [131] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)
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