Transliteration: (Summa qasat quloobukum mim ba'di zaalika fahiya kalhijaarati aw-ashaadu qaswah; wa inna minal hijaarati lamaa yatafajjaru minhul anhaar; wa inna minhaa lamaa yash shaqqaqu fayakhruju minhul maaa'; wa inna minhaa lamaa yahbitu min khashyatil laa; wa mal laahu bighaafilin 'ammaa ta'maloon)
दिलों की सख़्ती का अंजाम:
इस आयत में बताया गया है कि चमत्कार देखने और अल्लाह की निशानियाँ मिलने के बावजूद, कुछ लोगों के दिल नरम होने के बजाय और ज़्यादा सख़्त हो जाते हैं। ये उन लोगों की मिसाल है जो हक़ को जानकर भी उससे मुंह मोड़ लेते हैं।
पत्थर भी अल्लाह से डरते हैं:
क़ुरआन कहता है कि कुछ पत्थर ऐसे हैं जो अल्लाह के डर से गिर पड़ते हैं। इसका मतलब यह है कि इंसानी दिल अगर अल्लाह की पहचान और उसके डर से ख़ाली हो जाएं, तो वे पत्थरों से भी बदतर हो जाते हैं।
अल्लाह हर अमल से बाख़बर है:
अल्लाह हर इंसान के कामों को जानता है — चाहे वह छिपा हुआ हो या ज़ाहिर। कोई भी हरकत अल्लाह की नज़र से ओझल नहीं है।
इस आयत से ये शिक्षा मिलती है कि इंसान को अपने दिल को नरम रखना चाहिए, अल्लाह के डर और मोहब्बत के साथ जीना चाहिए, वरना उसका दिल पत्थर से भी बदतर हो सकता है।
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